श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई उपनगर के भांडुप में प्रस्तावित महत्वाकांक्षी भांडुप बर्ड पार्क (पक्षी उद्यान) परियोजना को गति मिल गई है। मुंबई उपनगर के पालकमंत्री एवं महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मंत्री एडवोकेट आशिष शेलार ने सोमवार को परियोजना स्थल का निरीक्षण किया और बताया कि इसके लिए जिला नियोजन समिति के विशेष निधि से 45 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे।


आशिष शेलार ने कहा कि यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में मुंबई के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। निरीक्षण के दौरान स्थानीय विधायक मिहिर कोटेचा सहित जनप्रतिनिधि और संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे।


यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय महत्व के रामसर स्थल ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य क्षेत्र में, भांडुप पंपिंग स्टेशन के समीप लगभग 20.09 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जाएगी। इसमें केवल 0.35 हेक्टेयर क्षेत्र में पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि प्राकृतिक पारिस्थितिकी पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
इस क्षेत्र में मैंग्रोव वन, दलदली क्षेत्र और खारे पानी के प्राकृतिक आवास हैं, जहां स्थानीय और प्रवासी मिलाकर लगभग 250 प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। परियोजना के तहत बर्ड वॉचिंग सेंटर, व्यूइंग डेक, बहुमंजिला वॉच टावर, 2.16 किलोमीटर लंबा मैंग्रोव नेचर ट्रेल, बटरफ्लाई गार्डन, जेट्टी, नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर, व्याख्यान कक्ष, पार्किंग और अन्य पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि भांडुप बर्ड पार्क भारत का पहला कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित पक्षी पहचान और निगरानी प्रणाली वाला इको-टूरिज्म केंद्र बनेगा। यहां रियल-टाइम बर्ड मॉनिटरिंग, AI आधारित पक्षी पहचान, स्वचालित ट्रैकिंग, इवेंट एनालिटिक्स, रिकॉर्डिंग, डिजिटल डेटा प्रबंधन और लाइव सिंक्रोनाइजेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इससे देश-विदेश के पर्यटक, शोधकर्ता, पक्षी विशेषज्ञ और प्रकृति प्रेमियों को अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।
आशिष शेलार ने बताया कि परियोजना को महाराष्ट्र नेचर टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड की कार्यकारी समिति की मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा महाराष्ट्र इको-टूरिज्म बोर्ड, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) से आवश्यक सीआरजेड (CRZ) मंजूरी तथा मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) की तकनीकी स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, आधुनिक तकनीक और सतत पर्यटन का अनूठा संगम होगी, जिससे मुंबई उपनगर के पर्यावरण और पर्यटन विकास को नई दिशा मिलेगी।


