श्रीश उपाध्याय /मुंबई वार्ता

महाराष्ट्र सरकार जल्द ही मुंबई में सरकारी जमीन पर बने सभी जिमखानों का निरीक्षण करेगी। इस जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित जिमखाने लीज एग्रीमेंट और अन्य सरकारी नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। एक सरकारी अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।


अधिकारियों के अनुसार, मुंबई में करीब 10 जिमखाने सरकारी जमीन पर संचालित हो रहे हैं और राज्य सरकार को इनसे हर साल लगभग दो करोड़ रुपये किराए के रूप में प्राप्त होते हैं।
यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक परिसर खाली करने का नोटिस जारी किया है। केंद्र ने यह कार्रवाई “रक्षा ढांचे को मजबूत करने” और “सार्वजनिक सुरक्षा” के उद्देश्य से बताई है।
मुंबई के प्रमुख जिमखानों में बॉम्बे जीमखाना सबसे चर्चित माना जाता है। इसकी स्थापना वर्ष 1875 में हुई थी। क्लब को दी गई 99 वर्ष की लीज 2006-07 में समाप्त हो चुकी है।
सरकारी अधिकारी ने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले जिमखानों को नोटिस जारी किए जाते हैं और कुछ मामलों में सुनवाई भी की जाती है। मुंबई के अन्य प्रमुख जिमखानों में पी. जे. हिंदू जीमखाना, कैथोलिक जीमखाना, पारसी जीमखाना, वोड.हाउस जीमखाना, PVM जीमखाना और इस्लाम जीमखाना शामिल हैं।
अधिकारी ने यह भी बताया कि जिमखानों के लिए बनाई गई 2003 की किराया नीति को अदालत में चुनौती दी गई थी। बाद में इसमें संशोधन किए गए और आखिरी बदलाव वर्ष 2025 में किया गया। हाल ही में राज्य सरकार ने जिमखानों के लिए नई नीति तैयार करने हेतु एक समिति भी गठित की है।
इसी बीच, बॉम्बे जीमखाना और बीएमसी के बीच सड़क चौड़ीकरण को लेकर विवाद भी जारी है। बीएमसी हज़ारीमल सोमानी मार्ग के विस्तार के लिए लगभग 3,000 वर्गमीटर जमीन अधिग्रहित करना चाहती है, जिसका क्लब विरोध कर रहा है।


