मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक संगठित और बेहद खतरनाक किडनैपिंग गैंग का पर्दाफाश किया है। 13 जून को दो व्यक्तियों के अपहरण की घटना सामने आई थी, जिसके बाद इस मामले में 10 जुलाई को ओशिवारा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच शुरू की।


● जांच में बड़ा खुलासा:
पीड़ितों को पहले रायगढ़ जिले के एक फार्महाउस में बंधक बनाकर उनके साथ मारपीट की गई। बाद में उन्हें मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश तक घुमाया गया। अपहरणकर्ताओं ने उनके परिवार से ₹50 लाख की फिरौती की मांग की थी।
● गिरफ्तारी अभियान:
मुंबई क्राइम ब्रांच ने इस केस में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है— 4 आरोपी मुंबई और रायगढ़ से 3 आरोपी उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से सभी आरोपियों को 19 जुलाई तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है। मकसद था पैसे की वसूली: इस अपहरण की जड़ें एक पुराने पैसों के लेन-देन से जुड़ी हैं। पुलिस का कहना है कि यह पूरा प्लान बहुत ही पेशेवर तरीके से अंजाम दिया गया। गैंग की पृष्ठभूमि और आपराधिक रिकॉर्ड: मुख्य आरोपी मेहताब और सरवर सहित कई लोगों पर पहले से ही गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं, जिनमें NDPS एक्ट भी शामिल है। पुलिस को शक है कि इस गैंग का नेटवर्क महाराष्ट्र, यूपी और एमपी तक फैला हुआ है।
● वाहन जब्त – रैकेट पर शिकंजा:
अपराध में इस्तेमाल तीन वाहन जब्त किए जा चुके हैं, और एक अन्य संदिग्ध वाहन की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह के और भी साथी हो सकते हैं, जिनकी गिरफ्तारी जल्द की जाएगी। पुलिस का बयान: मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने बताया कि यह एक संगठित अपराध गिरोह है जो फिरौती के लिए टारगेट ढूंढकर प्लानिंग से अपहरण करता है। पूरे मामले में गहन पूछताछ और अन्य राज्यों से लिंक की जांच जारी है।


