श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई पुलिस जिस ढंग से चुनिंदा पत्रकारों को क्राइम रिपोर्टर ग्रुप में जोड़ रही है उससे तो यही प्रतीत हो रहा है कि मुंबई पुलिस का यह ग्रुप किसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का ग्रुप हो गया है।


मुंबई क्राइम रिपोर्टर एसोसिएशन के काफी सालों से बने ग्रुप को कुछ दिनों पहले रद्द कर दिया गया। नए ग्रुप में पत्रकारों को जोड़ने की जवाबदारी मुंबई पुलिस (अपराध) के पुलिस उपायुक्त राज तिलक रोशन को दी गई। करीब डेढ़ महीने पहले उनके निर्देशानुसार उक्त ग्रुप में जुड़ने से संबंधित सभी जरूरी कागजात उपलब्ध कराए गए,इसके बावजूद मुंबई वार्ता पत्रकार को इस ग्रुप में नहीं जोड़ा गया।


प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त ग्रुप में कई ऐसे पत्रकार शामिल हैं जो किसी भी अधिकृत मीडिया संस्थान से नहीं जुड़े हुए हैं। कुछ ऐसे पत्रकार भी है जिन पर आपराधिक मामले भी दर्ज है। मुंबई पुलिस इस ग्रुप में ऐसे पत्रकारों को क्यों जोड़ रही है और सही ढंग से पत्रकारिता करने वालों को ग्रुप से दूर क्यों रखना चाहती है? इन सवालों के जवाब मांगने के लिए फोन करने पर पुलिस उपायुक्त राज तिलक रोशन ने फोन नहीं उठाया और WhatsApp पर संदेश देखने के बाबजूद कोई जवाब नहीं दिया।
इस मामले संबंधी एक संदेश पुलिस आयुक्त देवेन भारती को भी दिया गया है। अब देखना यह है कि मुंबई क्राइम रिपोर्टर एसोसिएशन के ग्रुप को मुंबई पुलिस सही मायनों में जानकारी देने का माध्यम बनाती है या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह पुलिस की चाटुकारिता करने वाले स्वयं घोषित पत्रकारों को उपकृत करने का जरिया !


