मुंबई पुलिस ने किया मासूम बच्चों की खरीद-फरोख्त का पर्दाफाश।

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राजेश जायसवाल / मुंबई वार्ता

मुंबई के वडाला ट्रक टर्मिनल पुलिस थाने अंतर्गत एक बेहद चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहां एक शख्स ने करीब आठ महीने पहले शिकायत दर्ज कराई थी कि उनका बेटा और दो साल का पोता दोनों लापता हैं। इसके बाद पुलिस ने दोनों की तलाश शुरू की और तलाश के दौरान उन्हें शिकायतकर्ता का बेटा तो मिल गया लेकिन पोता नहीं मिला था। पुलिस ने जब जांच आगे बढ़ाई तो पता चला कि शिकायतकर्ता के बेटे ने ही उनके पोते को १ लाख ६० हजार रुपये में किसी को बेच दिया था। जिसके बाद पुलिस ने शिकायतकर्ता के बेटे अनिल पुरवैय्या को गिरफ्तार कर लिया।

अनिल से जब कड़ाई से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि उसने उसके बेटे को आसमा शेख नाम की महिला को बेच दिया था। आसमा ने बच्चे को आशा पवार नाम की महिला को दिया जिसने बच्चे को ओडिशा के भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन पर रश्मि बनर्जी नाम की महिला को १ लाख ८० हजार रुपये में बेच दिया था।

■ पुलिस से बचने के लिए छोड़ी नौकरी

परिमंडल- ४ की पुलिस उपायुक्त रागसुधा आर. ने बताया कि हमने जब जांच को आगे बढ़ाया तब पता चला कि रश्मि एक अस्पताल में बतौर डेंटिस्ट के रूप में काम करती है और जब इस बात का पता रश्मि को चल गया था कि उसने जो बच्चा खरीदा है उस बच्चे की तलाश पुलिस कर रही है तो रश्मि उस अस्पताल से इस्तीफा देकर दूसरे अस्पताल में नौकरी करने लगी। कुछ दिन बाद उसने दूसरे अस्पताल से भी इस्तीफा दे दिया और अंडरग्राउंड हो गई।

डीसीपी ने आगे बताया कि टेक्निकल एनालिसिस करने के बाद हमें जानकारी मिली और उस जानकारी के आधार पर हमने रश्मि बनर्जी को कोलकाता के हुबली इलाके से गिरफ्तार कर लिया और फिर उसके घर से दो बच्चों को रेस्क्यू किया गया। जिसमें से एक बच्चा वह है जिसकी हम तलाश कर रहे थे।वहीं, एक दूसरी बच्ची जो की चार साल की थी उसे भी हमने रेस्क्यू किया। पूछताछ में रश्मि ने बताया कि दूसरी बच्ची की उम्र जब एक महीने थी तब उसने इसे चार लाख रुपये में खरीदा था। क्योंकि इस बच्ची की कोई शिकायत हमारे पास नहीं थी इस वजह से हमने कोलकाता में ही सीडब्लूसी में उस बच्ची को संभालने के लिए हैंडओवर कर दिया।

उन्होंने बताया कि जब पुलिस ने दो साल के शिकायतकर्ता के पोते को रेस्क्यू किया, तो उसके शरीर पर गंभीर मारपीट के निशान पाए गए। इसके बाद दोनों बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया और फिर उन्हें चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (सीडब्लूसी) को सौंप दिया गया। रश्मि से जब पूछा गया कि उसने दो साल के बच्चे की इतनी पिटाई क्यों की? तब उसने बताया कि उसकी नौकरी चली गई थी और उसे दूसरी जगह नौकरी नहीं मिल रही थी उसे लगता था कि वह इस बच्चे की वजह से उसे नौकरी नहीं मिल रही है।

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