■ सर्वदलीय नगरसेवक मुश्किल में !
■ शिवसेना यूबीटी के 24, भाजपा के 16, कांग्रेस के 10 मामलों समेत सभी प्रमुख दलों के नगरसेवक कानूनी चुनौती के घेरे में.
मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजे आने के बाद भी विजयी उम्मीदवारों की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। चुनाव में पराजित उम्मीदवारों ने विजयी नगरसेवकों के निर्वाचन को विभिन्न कारणों से चुनौती दी है। मुंबई महानगरपालिका द्वारा आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को दी गई जानकारी के अनुसार, कुल 79 चुनाव याचिकाएं दाखिल की गई हैं।


इस बीच, हाल ही में पूर्व महापौर विशाखा राऊत का नगरसेवक पद रद्द होने के बाद चुनाव याचिकाओं का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इससे स्पष्ट होता है कि चुनाव में जीत हासिल करना अंतिम चरण नहीं है, बल्कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज, शपथपत्र में दी गई जानकारी, जाति प्रमाणपत्र तथा उम्मीदवार द्वारा की गई विभिन्न घोषणाओं की कानूनी जांच भी महत्वपूर्ण है।


खास बात यह है कि इन याचिकाओं में किसी एक दल के नगरसेवक ही निशाने पर नहीं हैं, बल्कि मुंबई के प्रमुख सर्वदलीय नगरसेवकों के खिलाफ चुनाव याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इससे चुनाव के बाद नगरसेवक के रूप में प्राप्त पद की कानूनी वैधता और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।जाति प्रमाणपत्र से संपत्ति की जानकारी तक आपत्तिपराजित उम्मीदवारों द्वारा दाखिल याचिकाओं में कई गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। इनमें जाति प्रमाणपत्र की वैधता, उम्मीदवार द्वारा दी गई जानकारी गलत अथवा भ्रामक होने के आरोप, आपराधिक मामलों की जानकारी तथा संपत्ति और आर्थिक मामलों से संबंधित घोषणाओं पर आपत्ति शामिल है
।चुनाव लड़ते समय उम्मीदवारों को शपथपत्र के माध्यम से अपनी व्यक्तिगत, आर्थिक और कानूनी जानकारी सार्वजनिक करनी होती है। इस जानकारी में विसंगति अथवा गलत जानकारी दिए जाने का आरोप होने पर कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसलिए चुनाव आवेदन और शपथपत्र में दी गई प्रत्येक जानकारी का महत्व इस पूरे मामले से सामने आया है।
शिवसेना यूबीटी के खिलाफ सर्वाधिक 24 याचिकाएंमहानगरपालिका द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, दलवार स्थिति देखें तो शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नगरसेवकों के खिलाफ सर्वाधिक 24 याचिकाएं दाखिल हुई हैं।इसके बाद भाजपा के खिलाफ 16, कांग्रेस के खिलाफ 10 और शिवसेना (शिंदे) के खिलाफ 7 याचिकाएं दाखिल हुई हैं।
इसके अलावा एमआईएम के खिलाफ 5, मनसे के खिलाफ 2 और राष्ट्रवादी कांग्रेस के खिलाफ 1 याचिका दाखिल हुई है।5 नगरसेवकों का निर्वाचन रद्दकुल 79 याचिकाओं में से अब तक 5 नगरसेवकों के निर्वाचन पर प्रतिकूल निर्णय हुआ है और उनका निर्वाचन रद्द किया गया है। इनमें शिवसेना यूबीटी के 2, एमआईएम के 2 और राष्ट्रवादी कांग्रेस के 1 नगरसेवक शामिल हैं।
इससे यह स्पष्ट होता है कि चुनाव जीतना अंतिम मंजिल नहीं है। उम्मीदवार की उम्मीदवारी से लेकर शपथपत्र में दी गई जानकारी और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की शुद्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा फिर ऐरणी परआरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली द्वारा मांगी गई जानकारी से यह आंकड़ा सामने आया है।
जनता के प्रतिनिधि के रूप में चुने जाने वाले उम्मीदवारों द्वारा मतदाताओं के सामने प्रस्तुत की गई जानकारी सही और तथ्यात्मक होना आवश्यक है। यदि उसमें किसी प्रकार की त्रुटि, विसंगति या तथ्य छिपाने का आरोप सामने आता है, तो उसका असर चुनाव परिणाम पर भी पड़ सकता है।
79 चुनाव याचिकाएं, उनमें से 5 नगरसेवकों का निर्वाचन रद्द होना और हाल ही में पूर्व महापौर विशाखा राऊत का पद रद्द होना—इन घटनाओं ने मुंबई महानगरपालिका चुनाव में उम्मीदवारों की उम्मीदवारी और शपथपत्रों की पारदर्शिता के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।अब शेष याचिकाओं में क्या निर्णय होता है, इस पर राजनीतिक क्षेत्र की नजरें टिकी हैं। यदि इनमें से कुछ और नगरसेवकों के निर्वाचन पर सवाल उठते हैं, तो इसका असर महानगरपालिका में विभिन्न दलों के संख्याबल पर भी पड़ सकता है।
चुनाव में मतदाताओं का जनादेश हासिल कर विजयी होने के बावजूद न्यायिक कसौटी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में मुंबई महानगरपालिका के सर्वदलीय नगरसेवकों के निर्वाचन के सामने कानूनी चुनौती खड़ी हो गई है।


