मुंबई वार्ता संवाददाता

श्री नारायण भक्ति पंथ (SNBP) की ओर से भगवान महाविष्णु की एक ऐतिहासिक 12 वर्षीय आध्यात्मिक यात्रा ‘श्री नारायण रथ यात्रा’ का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार यह यात्रा भारत की लंबाई-चौड़ाई में भ्रमण करते हुए देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचेगी। इस महायात्रा का उद्देश्य एक महामूर्ति, एक महायात्रा और एक सनातन चेतना के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रूप से जोड़ना है।


इस संबंध में 9 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे मुंबई प्रेस क्लब, ग्लास हाउस, महापालिका मार्ग, आजाद मैदान, फोर्ट, मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई है। आयोजकों के मुताबिक महायात्रा का औपचारिक शुभारंभ 21 जनवरी 2027 को मुंबई के महालक्ष्मी रेसकोर्स से किया जाएगा।
■ 12 वर्षों तक चलेगी आध्यात्मिक यात्रा
प्रेस निमंत्रण के अनुसार, ‘श्री नारायण रथ यात्रा’ भारत के विभिन्न क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। इसका मार्ग देश की लंबाई और चौड़ाई में निर्धारित किया गया है। आयोजकों का दावा है कि यह यात्रा करोड़ों श्रद्धालुओं को भगवान महाविष्णु के दर्शन और आध्यात्मिक संदेश से जोड़ने का प्रयास होगी।
इस महायात्रा का आयोजन सद्गुरु श्री लोकेशनंदजी महाराज, संस्थापक श्री नारायण भक्ति पंथ, के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
■ 15 फीट ऊंची और करीब 9 टन वजनी महामूर्ति
आयोजकों के अनुसार इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण भगवान महाविष्णु की पंचधातु से निर्मित महामूर्ति होगी। शेषशायी स्वरूप में बनाई गई यह प्रतिमा करीब 15 फीट लंबी और लगभग 9 टन वजनी है। प्रेस निमंत्रण में दावा किया गया है कि इस प्रतिमा के निर्माण में करीब 12 महीने का समय लगा और इसकी लागत लगभग 30 करोड़ रुपये रही।
आयोजकों के अनुसार यह महामूर्ति 12 वर्षों तक चलने वाली यात्रा का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र होगी और इसके माध्यम से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिलेगा। प्रेस नोट में लगभग 120 करोड़ श्रद्धालुओं तक पहुंचने का अनुमान भी व्यक्त किया गया है।
■ 15 वर्ष की उम्र से शुरू की आध्यात्मिक साधना
प्रेस निमंत्रण में सद्गुरु श्री लोकेशनंदजी महाराज के जीवन का भी उल्लेख किया गया है। उनका जन्म 21 फरवरी 1980 को मध्य प्रदेश के इंदौर में बताया गया है। 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने ईश्वर भक्ति के मार्ग पर कदम रखा। अपने सद्गुरु स्वामी श्री अच्युतानंदजी महाराज के मार्गदर्शन में उन्होंने सेवा, साधना, उपासना और ध्यान को समर्पित जीवन अपनाया।
प्रेस नोट के अनुसार, 12 वर्षों की कठोर तपस्या और अपने गुरु के ब्रह्मलीन होने के बाद वे अपने जन्मस्थान लौटे और सत्संग के माध्यम से श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करने लगे। वर्ष 2016 में उन्होंने श्री नारायण भक्ति पंथ की स्थापना की तथा महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में श्री नारायणपुरम तीर्थ (शहादा धाम) की स्थापना की।
आयोजकों ने इस 12 वर्षीय आध्यात्मिक यात्रा को देश को भक्ति और सनातन चेतना के सूत्र में जोड़ने वाला ऐतिहासिक आयोजन बताया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में महायात्रा से जुड़ी विस्तृत जानकारी और कार्यक्रम की रूपरेखा सामने रखी जाएगी।


