श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई में आंदोलन करने पर कथित तौर पर लगाई गई पाबंदी को लेकर मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड ने भाजपा महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान हर नागरिक को अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर आंदोलन करने का अधिकार देता है, लेकिन भाजपा महायुति सरकार मुंबई में आंदोलन के अधिकार पर ही रोक लगाने का प्रयास कर रही है।


वर्षा गायकवाड ने कहा कि सरकार ने मुंबई में आंदोलन करने के लिए केवल आज़ाद मैदान को निर्धारित किया है और वहां भी सिर्फ एक दिन आंदोलन करने की अनुमति देने का फैसला किया गया है। उन्होंने इस निर्णय को तानाशाही और तुगलकी शासन का उदाहरण बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
सांसद गायकवाड ने भाजपा महायुति सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार कुछ चुनिंदा लोगों के हित में काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्योगपतियों और ठेकेदारों के लिए नियम और शर्तों में बदलाव किए जाते हैं, जबकि आम जनता के सवालों और समस्याओं की अनदेखी की जाती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार को मुंबई में लोगों के आंदोलन से आखिर किस बात का डर है।
गायकवाड ने कहा कि भारत में लोकतंत्र है और सरकार संविधान के अनुसार चलती है। किसी की इच्छा या मनमाने तरीके से शासन नहीं चलाया जा सकता।
गायकवाड ने मुख्यमंत्री के हालिया बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि संविधान के कारण ही वे मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार संविधान की वजह से सत्ता में आई है तो फिर उसी सरकार के फैसलों में संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी क्यों दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि मुंबई में केवल आज़ाद मैदान में, वह भी तय दिन और निर्धारित समय के भीतर ही आंदोलन करने की अनुमति देना लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंटने जैसा है। कांग्रेस इस तरह के किसी भी निर्णय को स्वीकार नहीं करेगी।
वर्षा गायकवाड ने कहा कि सरकार से सवाल पूछना और अपनी मांगों के लिए आवाज उठाना हर नागरिक का अधिकार है और इसे कोई भी सरकार नहीं छीन सकती। उन्होंने सरकार से आंदोलन पर रोक लगाने वाले आदेश को तत्काल रद्द करने की मांग की।
सांसद वर्षा गायकवाड ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया तो उसे इसकी बड़ी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।


