मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (MMRDA) के कामकाज को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। गुंदवली से छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे को जोड़ने वाली मेट्रो 7A परियोजना का काम पूरा होने की ओर है, लेकिन इसी बीच करीब 260 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया लगभग एक किलोमीटर लंबा पुल तोड़ने की नौबत सामने आई है। इस मामले ने परियोजना की योजना, डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


मेट्रो 7A, मेट्रो लाइन-7 का विस्तार है, जिसे गुंदवली से छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे तक पहुंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है। यह करीब 3.4 किलोमीटर लंबी परियोजना है, जिसमें लगभग 0.94 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड और 2.50 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत है। परियोजना में दो स्टेशन शामिल हैं और इसका भूमिगत हिस्सा एयरपोर्ट तक पहुंच प्रदान करेगा।
■ 260 करोड़ का पुल तोड़ने की स्थिति क्यों बनी?
रिपोर्ट के मुताबिक, मेट्रो 7A के निर्माण के दौरान करीब एक किलोमीटर लंबे पुल का निर्माण किया गया था। इस पुल पर लगभग 260 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई है। अब परियोजना के आगे के काम और आवश्यक बदलावों के कारण इस पुल को हटाने की स्थिति पैदा हुई है। करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए बुनियादी ढांचे को कुछ ही समय बाद तोड़ने की नौबत आने से सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
विपक्ष और नागरिकों की ओर से यह सवाल उठाया जा सकता है कि यदि पुल को भविष्य में हटाना ही था, तो इसकी योजना और डिजाइन तैयार करते समय इस पहलू का ध्यान क्यों नहीं रखा गया। साथ ही, निर्माण से पहले संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय और तकनीकी सर्वेक्षण किस स्तर पर किया गया था, इसकी भी जांच की मांग उठ सकती है।
■ मेट्रो 7A की महत्वपूर्ण परियोजना
MMRDA के अनुसार, मेट्रो 7A मुंबई के मेट्रो नेटवर्क को सीधे अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। इस कॉरिडोर के जरिए मेट्रो लाइन-7 के यात्रियों को एयरपोर्ट तक सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही, यह मेट्रो लाइन-3 के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा स्टेशन से भी जुड़ाव उपलब्ध कराएगी।
परियोजना के निर्माण के दौरान कई तकनीकी चुनौतियां भी सामने आई हैं। इनमें भूमिगत सीवेज पाइपलाइन को स्थानांतरित करना, झुग्गी बस्तियों का पुनर्वास और मेट्रो लाइन-3 के मौजूदा भूमिगत सुरंगों के बेहद करीब से सुरंग निर्माण जैसे काम शामिल हैं।
■ दिसंबर 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य
MMRDA ने मेट्रो 7A को दिसंबर 2026 तक यात्री सेवा में लाने का लक्ष्य रखा है। परियोजना के भूमिगत हिस्से के टनलिंग का काम 2025 में महत्वपूर्ण चरण तक पहुंच गया था और इसके बाद ट्रैक तथा अन्य सिस्टम से जुड़े कामों को गति दी गई।
अब करोड़ों रुपये की लागत से बने पुल को तोड़ने की खबर ने परियोजना की लागत और कार्य-योजना पर नया विवाद खड़ा कर दिया है। यदि वास्तव में सार्वजनिक धन से तैयार किए गए इस ढांचे को हटाना पड़ता है, तो पुल के निर्माण का निर्णय किस आधार पर लिया गया, डिजाइन किसने मंजूर किया, बदलाव की जरूरत कब सामने आई और इसकी जिम्मेदारी किसकी है, इन सवालों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल इस मामले में MMRDA की ओर से पुल को तोड़े जाने के कारण और इससे होने वाले वास्तविक वित्तीय नुकसान पर विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है। इसलिए 260 करोड़ रुपये के खर्च और पुल को हटाने से जुड़े सभी तकनीकी तथा वित्तीय पहलुओं की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही अंतिम जिम्मेदारी तय हो सकेगी।


