मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

शुक्रवार को उच्च न्यायालय के आदेश के बाद, एयर क्वालिटी सुधारने के तुरंत उपाय के तौर पर, कंस्ट्रक्शन साइट्स पर पॉल्यूशन कंट्रोल नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, यह जांचने के लिए पांच मेंबर वाली इंडिपेंडेंट कमेटी बनाई गई, जो पॉल्यूशन का एक बड़ा सोर्स हैं। यह आदेश देते हुए, चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने साफ किया कि बहुत खराब एयर क्वालिटी इंडेक्स वाले इलाकों का इंस्पेक्शन करने के लिए बनाई गई कमेटी में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, एमपीसीबी, पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट के अधिकारी और दो वकील शामिल होंगे।


यह भी आदेश दिया गया कि कमेटी के सदस्यों को इंस्पेक्शन के दौरान सिक्योरिटी दी जाए और शॉर्ट-टर्म इंस्पेक्शन के लिए कंस्ट्रक्शन साइट्स में जाने दिया जाए। अदालत ने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और महाराष्ट्र पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (एमपीसीबी) से पिछले साल एयर पॉल्यूशन को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की डिटेल्स भी जमा करने को कहा।


पहले के आदेशानुसार, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और एमपीसीबी की टीमों को कंस्ट्रक्शन साइट्स पर जाकर यह चेक करना चाहिए था कि वहां सीसीटीवी कैमरे और सेंसर-बेस्ड एयर पॉल्यूशन मॉनिटर लगाए गए हैं या नहीं। इसलिए, अदालत ने आदेश दिया कि पिछले साल की गई इन कार्रवाइयों की डिटेल्स जमा की जाएं।
म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की ओर से पेश सीनियर वकील मिलिंद साठे ने दावा किया कि कंस्ट्रक्शन साइट्स पर पॉल्यूशन कंट्रोल नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, यह चेक करने के लिए ६४ स्पेशल टीमें तैनात की गई हैं और ५३ कंस्ट्रक्शन साईट को काम रोकने का नोटिस दिया गया है, और टीमों की संख्या जल्द ही बढ़ाकर ९० कर दी जाएगी।
एक न्यूज़ रिपोर्ट के अनुसार मुंबई में १,००० कंस्ट्रक्शन साइट्स में से सिर्फ़ ४०० सेंसर लगाए गए हैं और उनमें से सिर्फ़ १७० ही काम कर रहे हैं, और कोर्ट को बताया कि यह सच है।


