मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

मुंबई में पिछले कुछ वर्षों में दोपहिया वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है और उनके लिए पर्याप्त पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराना शहर की बड़ी जरूरत बन गई है। मुंबई महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे ने कहा कि अब भवन पुनर्विकास प्रस्तावों में भी दोपहिया वाहनों की पार्किंग के लिए जगह की मांग बढ़ने लगी है, इसलिए भविष्य की योजना में इसे शामिल करना आवश्यक होगा।


उन्होंने कहा कि अब तक पार्किंग से जुड़े विकास नियंत्रण नियमों में मुख्य रूप से चारपहिया वाहनों को ध्यान में रखकर ही प्रावधान बनाए जाते रहे हैं। लेकिन मुंबई में दोपहिया वाहनों की संख्या जिस तेजी से बढ़ी है, उसका पहले अनुमान नहीं लगाया गया था।


आयुक्त ने बताया कि दोपहिया पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग फुटपाथों पर वाहन खड़े करने को मजबूर हो जाते हैं। इससे पैदल यात्रियों को परेशानी होती है और सड़क पर यातायात जाम की स्थिति भी बनती है।
अश्विनी भिडे ने कहा कि सड़क पर वाहन खड़ा करने पर जुर्माने का प्रावधान तो है, लेकिन जब लोगों को उचित विकल्प ही उपलब्ध नहीं होगा तो केवल दंड लगाकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग विदेशों की तर्ज पर मुंबई में ट्रैफिक कंजेशन टैक्स लागू करने की मांग करते हैं, लेकिन मजबूत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के बिना ऐसा संभव नहीं है। शहर में अच्छी पार्किंग व्यवस्था के साथ-साथ सार्वजनिक और निजी दोनों प्रकार की परिवहन सुविधाओं का संतुलन जरूरी है।
मेट्रो नेटवर्क के विस्तार पर बोलते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले एक-दो वर्षों में विभिन्न मेट्रो मार्ग आपस में जुड़कर एकीकृत नेटवर्क तैयार करेंगे। इससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी और खासकर दोपहिया वाहनों के उपयोग में कमी आएगी।
उन्होंने कहा कि जब लोगों को घर से सीधे कार्यालय तक मेट्रो की सुविधा मिलेगी, तभी वे निजी वाहनों का कम उपयोग करेंगे। फिलहाल निजी वाहन से निकलकर कहीं पार्किंग ढूंढना और फिर सार्वजनिक परिवहन लेना लोगों के लिए कठिन प्रक्रिया है।


