श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई में महिलाओं के लिए शुरू की गई एक महत्वपूर्ण नागरिक सुविधा अब विवादों में घिर गई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा महिलाओं की स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए शुरू किए गए “पिंक टॉयलेट” प्रोजेक्ट के तहत स्थापित एक टॉयलेट बस में कैफे चलाने का मामला सामने आया है।


■ क्या है पूरा मामला?
यह मामला फोर्ट इलाके के फैशन स्ट्रीट के पास का है, जहां महिलाओं के लिए बनाए गए “पिंक टॉयलेट” बस के पिछले हिस्से में एक फूड स्टॉल संचालित किया जा रहा था।
यह बस मूल रूप से महिलाओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ सुविधा के रूप में बनाई गई थी, जिसमें टॉयलेट, चेंजिंग रूम और अन्य जरूरी सुविधाएं शामिल हैं।


■ स्वच्छता को लेकर उठे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों और महिलाओं ने गंभीर आपत्ति जताई है।
लोगों का कहना है कि टॉयलेट के साथ ही खाने-पीने की चीजें बेचना पूरी तरह अस्वच्छ और असुरक्षित है।
● खाने की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल
● संक्रमण और गंदगी का खतरा
● महिलाओं के लिए असहज माहौल
टॉयलेट के सामने स्वच्छता सुविधा और पीछे कैफे का यह विरोधाभास सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
■ अनुमति और वैधता पर भी विवाद
मामले ने अब कानूनी और प्रशासनिक रूप ले लिया है।
कैफे चलाने वाले व्यक्ति ने कथित तौर पर स्थानीय राजनीतिक कार्यालय से अनौपचारिक अनुमति होने का दावा किया, लेकिन वह कोई वैध लाइसेंस या दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं:
■ क्या कैफे को आधिकारिक अनुमति मिली थी?
क्या फूड सेफ्टी और नगर निगम के नियमों का पालन हुआ?
क्या सार्वजनिक सुविधा का दुरुपयोग किया गया?
■ BMC की चुप्पी
फिलहाल बृहन्मुंबई महानगरपालिका की ओर से इस मामले में कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, जिससे स्थिति और अधिक अस्पष्ट बनी हुई है।
यह मामला अब न सिर्फ स्वच्छता बल्कि सार्वजनिक सुविधाओं के सही उपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।


