मुंबई वार्ता संवाददाता

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर भाजपा की मुंबई इकाई ने शनिवार को शहर में विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर महिलाओं के सशक्तिकरण का विरोध करने का आरोप लगाया।
यह प्रदर्शन लोकसभा में 2029 से 33% महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े बिल के पारित न होने के एक दिन बाद किया गया।


भाजपा मुंबई अध्यक्ष और विधायक अमित साटम ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस महिलाओं की बढ़ती भूमिका से असहज है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी परिवार, जिसने वर्षों तक संवैधानिक पदों का लाभ उठाया, वह अन्य महिलाओं को सशक्त होते नहीं देख सकता।
वहीं भाजपा विधायक मनीषा चौधरी के नेतृत्व में दहिसर में पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस और विपक्षी नेताओं के खिलाफ नारेबाजी की और कुछ बैनरों पर नेताओं की तस्वीरों को काला किया, जिनमें राहुल गांधी, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल, शरद पवार और उद्धव ठाकरे शामिल थे।
भाजपा मुंबई ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पिछले 27 वर्षों से महिला आरक्षण बिल को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया और इसे पारित कराने में देरी, बाधाएं और कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई। पार्टी का कहना है कि 1996 से लेकर 2014 तक विभिन्न सरकारों के दौरान कई मौके होने के बावजूद कांग्रेस इस बिल को लोकसभा में पारित नहीं करा सकी।
भाजपा ने यह भी दावा किया कि 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान बिल को पास कराने की कोशिश की गई, लेकिन समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और बहुजन समाज पार्टी के सांसदों के हंगामे के कारण प्रक्रिया बाधित हुई।
पार्टी के अनुसार, 2010 में यह बिल राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत से पास हुआ, लेकिन लोकसभा में आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि कांग्रेस अपने सहयोगी दलों के विरोध के कारण इसे आगे नहीं बढ़ा पाई।
भाजपा मुंबई ने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से जुड़े डिलिमिटेशन का विरोध करना 2029 के आम चुनाव से पहले इसके लागू होने में बाधा डाल सकता है। पार्टी ने दोहराया कि महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए यह कानून समय पर लागू होना जरूरी है।


