मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई शहर और उपनगरों में कुल 164 अवैध (बिना मान्यता प्राप्त) स्कूल संचालित होने का मामला सामने आया है। इस मुद्दे को विधान परिषद में उठाते हुए विपक्षी सदस्यों ने छात्रों के भविष्य पर चिंता जताई। स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने लिखित जवाब में स्वीकार किया कि इन स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को अन्य मान्यता प्राप्त स्कूलों में समायोजित करने में सरकार को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।


शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधान परिषद सदस्य अनिल परब और सचिन अहीर ने सरकार से पूछा कि अवैध स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद वे अब तक क्यों संचालित हो रहे हैं और इनमें पढ़ रहे विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है।
सरकार के अनुसार, मुंबई और उपनगरों में संचालित 164 अवैध स्कूलों में से 145 अंग्रेजी माध्यम के हैं। इनमें सबसे अधिक 65 स्कूल मानखुर्द-देवनार (एम/पूर्व वार्ड) में, 25 स्कूल मालाड (पी/उत्तर) में तथा 12-12 स्कूल कांदिवली (आर/दक्षिण) और कुर्ला (एल वार्ड) में स्थित हैं। अधिकांश स्कूल घनी आबादी वाली झुग्गी बस्तियों में चल रहे हैं, जहां पहले से ही मनपा स्कूल दो पालियों में संचालित हो रहे हैं। इसी कारण विद्यार्थियों का समायोजन चुनौतीपूर्ण बन गया है।
सरकार ने बताया कि सभी 164 अवैध स्कूलों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं और अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अपने बच्चों का प्रवेश बिना मान्यता वाले स्कूलों में न कराएं। साथ ही, 48 स्कूलों ने मान्यता प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए हैं, जिन पर नियमानुसार विचार किया जा रहा है।
दादा भुसे ने यह भी बताया कि दिसंबर 2023 के सरकारी आदेश के अनुसार यदि कहीं भी अवैध स्कूल शुरू होते हैं तो संबंधित शिक्षा अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का दावा है कि मुंबई में अवैध स्कूलों की संख्या 2022-23 के 210 से घटकर अब 164 रह गई है, लेकिन छात्रों के हितों की रक्षा के लिए आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।


