मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों में यात्रियों की बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पश्चिम रेलवे ने कंत्राटी (ठेका) कर्मचारियों की मदद लेने का फैसला किया है। पश्चिम रेलवे के मुंबई उपनगरीय नेटवर्क पर रोजाना करीब 30 लाख यात्री सफर करते हैं। ऐसे में पीक आवर के दौरान स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ को व्यवस्थित करना रेलवे के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।


भीड़ नियंत्रण के लिए तैनात किए जाने वाले कंत्राटी कर्मचारियों की मदद से यात्रियों की आवाजाही को व्यवस्थित करने, प्रवेश और निकास मार्गों पर भीड़ को नियंत्रित करने तथा प्लेटफॉर्म पर यात्रियों को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा।
रेलवे की ओर से स्टेशनों पर भीड़ के दबाव वाले स्थानों की पहचान कर वहां अतिरिक्त मनुष्यबल उपलब्ध कराने की योजना है। खासकर सुबह और शाम के व्यस्त समय में इन कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
पश्चिम रेलवे के मुंबई उपनगरीय क्षेत्र में यात्रियों की संख्या लगातार अधिक रहने के कारण प्लेटफॉर्म, फुटओवर ब्रिज, एस्केलेटर और स्टेशन के प्रवेश-निकास क्षेत्रों में भीड़ जमा हो जाती है। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेलवे कर्मचारियों के साथ कंत्राटी मनुष्यबल का उपयोग किया जाएगा।
रेलवे पहले भी यात्री सुविधा और भीड़ प्रबंधन के लिए गैर-रेलवे कर्मचारियों, स्टेशन सहायकों और कंत्राटी कर्मचारियों की सेवाओं का इस्तेमाल करता रहा है। हालिया रेलवे योजनाओं में भी कंत्राटी कर्मचारियों और अन्य गैर-रेलवे कर्मियों को भीड़ प्रबंधन व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है।
■ सुरक्षा और सुचारु आवाजाही पर जोर
भीड़ नियंत्रण का मुख्य उद्देश्य यात्रियों की आवाजाही को सुचारु बनाना और अत्यधिक भीड़ के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका को कम करना है। मुंबई की उपनगरीय रेल व्यवस्था में भीड़ लंबे समय से सुरक्षा की चुनौती रही है। विशेष रूप से ट्रेन के आने-जाने के समय प्लेटफॉर्म पर यात्रियों का दबाव अचानक बढ़ जाता है।
कंत्राटी कर्मचारियों की तैनाती से रेलवे को जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त मनुष्यबल उपलब्ध होगा। इससे नियमित रेलवे कर्मचारियों पर भीड़ प्रबंधन का अतिरिक्त दबाव कम होने की उम्मीद है।
पश्चिम रेलवे का यह कदम मुंबई लोकल से रोजाना यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित स्टेशन व्यवस्था तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, भीड़ की समस्या का स्थायी समाधान केवल मनुष्यबल बढ़ाने से नहीं, बल्कि स्टेशन की क्षमता बढ़ाने, बेहतर यात्री प्रवाह व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से ही संभव होगा।


