मुंबई साइबर फ्रॉड केस में झारखंड निवासी बरी, कोर्ट बोला- सिर्फ खाते में पैसे आना अपराध नहीं।

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श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता


मुंबई की गिरगांव अदालत ने एक अहम फैसले में झारखंड निवासी मनोज किस्कू को साइबर ठगी के मामले में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल किसी व्यक्ति के बैंक खाते में ठगी की रकम जमा हो जाना, बिना किसी आपराधिक साजिश के सबूत के, अपराध नहीं माना जा सकता।


गिरगांव कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट एस. जी. चिमणकर ने पिछले सप्ताह सुनाए गए फैसले में मनोज किस्कू को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ संदेह से परे मामला साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।


अदालत ने अपने आदेश में कहा, “केवल आरोपी के बैंक खाते में रकम जमा हो जाना, जब तक मुख्य आरोपी के साथ किसी आपराधिक साजिश का सबूत न हो, किसी अपराध का गठन नहीं करता।”


कोर्ट ने आगे कहा कि मामले में शिकायतकर्ता को आर्थिक नुकसान हुआ और आरोपी को आर्थिक लाभ मिला, जिससे अधिकतम दीवानी दायित्व बनता है, लेकिन इन परिस्थितियों में यह आपराधिक अपराध साबित नहीं होता।


अभियोजन के अनुसार, पुलिस अधिकारी प्रियंका हनुमंत पवार को 26 फरवरी 2022 को एक एसएमएस मिला, जिसमें एचडीएफसी बैंक खाता सक्रिय रखने के लिए पैन कार्ड अपडेट करने को कहा गया था। संदेश में दिए गए लिंक पर क्लिक कर उन्होंने अपनी जानकारी एक फर्जी वेबसाइट पर दर्ज कर दी।


इसके बाद उनके खाते से 99,986 रुपये ट्रांसफर हो गए। कुछ देर बाद उन्हें एक फोन कॉल आया, जिसमें ओटीपी मांगा गया। ओटीपी साझा करने के बाद उनके खाते से 2,99,970 रुपये और निकाल लिए गए।


जांच में पुलिस ने पाया कि फर्जी एसएमएस भेजने और कॉल करने में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर झारखंड के जामताड़ा निवासी रऊफ अंसारी के नाम पर पंजीकृत थे।


पुलिस ने ठगी की रकम में से 99,986 रुपये मनोज किस्कू के बैंक खाते में ट्रेस किए। इसके बाद 17 मार्च 2023 को किस्कू को भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 465 और 467 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया। बाद में अक्टूबर 2023 में उन्हें जमानत मिल गई।


आरोपी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अमोल थोमरे ने अदालत में दलील दी कि पुलिस मुख्य आरोपी रऊफ अंसारी को गिरफ्तार करने में विफल रही, जिसने सीधे शिकायतकर्ता से संपर्क कर धोखाधड़ी की थी।


बचाव पक्ष ने कहा कि अभियोजन कोई ऐसा सबूत पेश नहीं कर सका, जिससे यह साबित हो कि किस्कू और अंसारी के बीच कोई संपर्क, संवाद या आपराधिक साजिश थी।


सभी सबूतों पर विचार करने के बाद अदालत ने माना कि अभियोजन यह साबित करने में सफल रहा कि शिकायतकर्ता के खाते से धोखाधड़ी के जरिए पैसे निकाले गए, लेकिन यह साबित नहीं कर पाया कि फर्जी संदेश या लिंक मनोज किस्कू ने भेजे थे।


मजिस्ट्रेट ने यह भी कहा कि पुलिस ने न तो मुख्य संदिग्ध रऊफ अंसारी को गिरफ्तार किया और न ही किस्कू और अंसारी के बीच किसी साजिश को साबित करने वाला प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य सबूत पेश किया।

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