मुंबई वार्ता/ श्रीश उपाध्याय

मुंबई उपनगर के पालकमंत्री एडवोकेट आशिष शेलार ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) प्रशासन को निर्देश दिया है कि अतिरिक्त घोषित किए गए शिक्षकों को मुंबई से बाहर भेजने के बजाय शहर के भीतर ही समायोजित किया जाए और उनके वेतन पर किसी प्रकार की रोक न लगाई जाए।


वर्ष 2025-26 की स्टाफ मंजूरी के अनुसार मुंबई की निजी अनुदानित स्कूलों में 1,176 शिक्षक अतिरिक्त घोषित हुए हैं। वहीं, बीएमसी की विभिन्न स्कूलों में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद रिक्त हैं। इसी को देखते हुए भाजपा शिक्षक आघाड़ी के अध्यक्ष राजू बंडगर ने अतिरिक्त शिक्षकों को बीएमसी स्कूलों में समायोजित करने की मांग पालकमंत्री आशिष शेलार के समक्ष रखी थी।


इस मुद्दे पर गुरुवार को आयोजित बैठक में शिक्षक संगठनों ने मांग की कि अतिरिक्त शिक्षकों को पालघर, रायगढ़ और रत्नागिरी जैसे पड़ोसी जिलों में भेजने के बजाय मुंबई में ही समायोजित किया जाए।
बैठक में शिक्षा आयुक्त ने बताया कि राज्य सरकार की नीति के अनुसार बीएमसी स्कूलों में समायोजित किए जाने वाले शिक्षकों का वेतन महानगरपालिका द्वारा दिया जाना चाहिए। हालांकि, बीएमसी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पिछले वर्ष पारित प्रस्ताव के अनुसार ऐसे शिक्षकों का समायोजन केवल अस्थायी आधार पर किया जा सकता है। बीते वर्ष बीएमसी ने 533 अतिरिक्त शिक्षकों का अस्थायी समायोजन किया था।
बीएमसी की उपआयुक्त प्राची जांभेकर ने कहा कि स्थायी समायोजन की स्थिति में पेंशन, वरिष्ठता और शालार्थ आईडी से जुड़े तकनीकी मुद्दे उत्पन्न हो सकते हैं।
मामले में स्पष्ट सरकारी दिशा-निर्देशों के अभाव को देखते हुए पालकमंत्री आशिष शेलार ने शिक्षा विभाग और बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त बैठक बुलाकर एक माह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने और स्थायी समाधान के लिए आवश्यक कार्यप्रणाली एवं मानदंड तय करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि नई व्यवस्था लागू होने तक अतिरिक्त शिक्षकों का बीएमसी स्कूलों में अस्थायी समायोजन किया जाए और उनके वेतन का भुगतान किसी भी स्थिति में नहीं रोका जाए।


