मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

विधानसभा चुनाव से पहले आनन-फानन में लागू की गई ‘मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन’ योजना के २ करोड़ ५२ लाख लाभार्थियों में से २६ लाख ३४ हज़ार महिलाएं अब विभिन्न कारणों से अपात्र हो गई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि १४ हज़ार २९८ पुरुषों ने भी इस योजना का लाभ उठाया है।


उच्च पदस्थ अधिकारियों ने अनुमान लगाया है कि अपात्र लाभार्थियों के कारण वर्ष में लगभग ४ हज़ार ८०० करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अदिति तटकरे ने रविवार को खुद सोशल मीडिया पर अपात्र लाभार्थियों के आंकड़े पेश किए थे।
देवेंद्र फडणवीस सरकार के सत्ता में आने के बाद, आवेदनों का दोबारा सत्यापन करने का निर्णय लिया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस योजना के तहत सभी पात्र आवेदनों की पहचान करने के लिए सरकार के अन्य विभागों से जानकारी मांगी थी।
सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, २६ लाख ३४ हज़ार लाभार्थी अपात्र पाए गए हैं। तटकरे ने कहा कि कुछ ‘बहनें’ एक से ज़्यादा योजनाओं का लाभ उठा रही हैं और कुछ परिवारों में दो से ज़्यादा लाभार्थी हैं, जबकि कुछ जगहों पर पुरुषों ने भी आवेदन किया है।इन लाभार्थियों का मानदेय जून से अस्थायी रूप से निलंबित है।
उन्होंने आगे कहा कि लगभग २.२५ करोड़ पात्र लाभार्थियों को मानदेय वितरित किया जा चुका है। संबंधित ज़िला कलेक्टरों द्वारा अस्थायी रूप से निलंबित किए गए लाभों के सत्यापन के बाद, पात्र लोगों को धनराशि का वितरण फिर से शुरू किया जाएगा।
सरकार द्वारा लाभ फिर से शुरू किए जाएँगे, तटकरे ने कहा।चूँकि चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले महिलाओं के लिए डेढ हज़ार रुपये प्रति माह का मानदेय शुरू किया जाना था, इसलिए राज्य सरकार ने आवेदनों का सत्यापन किए बिना ही इसे देने का फैसला किया था।
हालाँकि इस योजना ने महायुति सरकार को सत्ता में वापसी में मदद की, लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि अपात्र लाभार्थियों के कारण सरकार को लगभग पाँच हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अब सवाल यह उठता है कि इस नुकसान के लिए कौन ज़िम्मेदार है।


