■ महावितरण 49वें स्थान पर.
मुंबई वार्ता संवाददाता

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा देश की निजी और सरकारी कुल 54 बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की रेटिंग जारी की गई है। इस मानांकन में महाराष्ट्र की महावितरण (महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी) को 49वां स्थान मिला है और उसे ‘सी’ श्रेणी में रखा गया है। इस रेटिंग से साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश और बिहार की कई बिजली वितरण कंपनियों ने महाराष्ट्र से बेहतर प्रदर्शन किया है।


■ किन आधारों पर हुई रेटिंग
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने यह रेटिंग बिजली वितरण कंपनियों के वित्तीय प्रबंधन, बिजली नुकसान (एटी एंड सी लॉसेस), बिल वसूली, उपभोक्ता सेवाएं, बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता, डिजिटल सेवाएं और तकनीकी सुधार जैसे मानकों के आधार पर तैयार की है।
■ महावितरण की कमजोरियां उजागर
रिपोर्ट के अनुसार महावितरण को अधिक बिजली नुकसान, बढ़ती बकाया राशि, वसूली में कमी और उपभोक्ता सेवाओं में अपेक्षित सुधार न होने के कारण कम अंक मिले हैं। कई क्षेत्रों में बार-बार बिजली कटौती, शिकायतों के निपटारे में देरी और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की धीमी गति भी इसकी रेटिंग गिरने के प्रमुख कारण माने गए हैं।
■ यूपी-बिहार की बेहतर स्थिति
उत्तर प्रदेश और बिहार की बिजली वितरण कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों में बिजली नुकसान कम करने, स्मार्ट मीटर लगाने, डिजिटल बिलिंग और ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया है। इसके चलते उनकी वसूली क्षमता और सेवा स्तर में सुधार हुआ, जिसका असर रेटिंग में भी देखने को मिला।
■ विशेषज्ञों की राय
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े उपभोक्ता आधार और औद्योगिक मांग के बावजूद महावितरण प्रबंधन संबंधी समस्याओं और वित्तीय दबाव से जूझ रही है। यदि समय रहते संरचनात्मक सुधार, तकनीकी उन्नयन और उपभोक्ता-केंद्रित नीतियां लागू नहीं की गईं, तो भविष्य में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
■ राज्य सरकार के लिए चुनौती
इस रेटिंग ने महाराष्ट्र सरकार और ऊर्जा विभाग के सामने महावितरण की कार्यक्षमता और छवि सुधारने की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। बिजली नुकसान कम करना, आर्थिक अनुशासन मजबूत करना और उपभोक्ता सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाना अब प्राथमिकता बन गया है।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की यह रेटिंग केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजली वितरण कंपनियों की वास्तविक स्थिति को दर्शाती है। ऐसे में महावितरण के लिए जरूरी हो गया है कि वह इस रिपोर्ट से सबक लेते हुए ठोस और प्रभावी सुधारात्मक कदम उठाए।


