मुंबई वार्ता संवाददाता

मराठा-कुणबी आरक्षण के तहत हैदराबाद गजेटियर के आधार पर कुणबी जात प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद, सितंबर से अब तक के पाँच महीनों में मराठवाड़ा क्षेत्र में कुल 35 हजार 160 कुणबी जात प्रमाणपत्र वितरित किए जा चुके हैं। इनमें सबसे अधिक प्रमाणपत्र बीड जिले में 23 हजार 802 जारी किए गए हैं, जबकि लातूर जिले में मात्र 241 कुणबी जात प्रमाणपत्र दिए गए हैं।


सितंबर 2025 के बाद प्राप्त आवेदनों और जारी किए गए प्रमाणपत्रों की संख्या अपेक्षाकृत कम होने पर चिंता जताते हुए, मंत्रिमंडल उपसमिति के अध्यक्ष एवं जलसंपदा मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने इस प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मराठवाड़ा के सभी जिलों में लंबित आवेदनों का शीघ्र निपटारा किया जाए और प्रमाणपत्र वितरण की रफ्तार बढ़ाई जाए।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में अक्टूबर के अंत में मुंबई में मराठा समाज का एक बड़ा मोर्चा निकाला गया था, जिसका नेतृत्व मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे ने किया था। इस आंदोलन के दौरान मराठवाड़ा में हैदराबाद गजेटियर लागू करने की प्रमुख मांग रखी गई थी।
इसके बाद, राधाकृष्ण विखे पाटील की अध्यक्षता वाली मराठा आरक्षण उपसमिति ने इस मांग को स्वीकार किया।सितंबर 2025 में जारी शासन निर्णय के बाद मराठवाड़ा के आठों जिलों में कुणबी जात प्रमाणपत्र के लिए आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। मंत्री विखे पाटील ने निर्देश दिए हैं कि ये आवेदन किसी भी स्थिति में लंबित न रहें और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई में तेजी लाई जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि गांव स्तर तक जाकर शासकीय तंत्र को सक्रिय रूप से काम करना चाहिए, ताकि पात्र लाभार्थियों को समय पर प्रमाणपत्र मिल सकें।इसके साथ ही, उन्होंने पूर्व न्यायमूर्ति संभाजी शिंदे द्वारा दी गई सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू करने, जात प्रमाणपत्र और वैधता प्रमाणपत्र वितरण में आ रही बाधाओं को दूर करने तथा हैदराबाद गजेटियर के आधार पर शासन निर्णय के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिला प्रशासन द्वारा की जा रही कार्यवाही की नियमित समीक्षा विभागीय आयुक्तों द्वारा किए जाने की बात भी उन्होंने कही।


