‘रामरक्षा आंदोलन’ के बहाने हिंदुओं को SIR पंजीकरण से भटकाने की साजिश: मंत्री आशीष शेलार का उद्धव ठाकरे पर हमला।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार ने शनिवार को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि ‘रामरक्षा आंदोलन’ के जरिए हिंदुओं को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया से दूर रखने की साजिश की जा रही है।


मुंबई में आयोजित पत्रकार वार्ता में शेलार ने कहा कि एक ओर हिंदुओं को आंदोलन में उलझाया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर एक विशेष वर्ग को SIR में पंजीकरण के लिए खुली छूट दी जा रही है। उनका आरोप था कि यह आंदोलन हिंदू समाज की पीड़ा के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ और हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण के उद्देश्य से प्रेरित है।


शेलार ने कहा कि उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री रहते हुए हनुमान चालीसा के पाठ का विरोध हुआ था, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने रामरक्षा आंदोलन पर कोई रोक नहीं लगाई। उन्होंने कहा कि यही दोनों सरकारों के दृष्टिकोण का अंतर है।


राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर शेलार ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले में एफआईआर दर्ज कर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। प्रथम दृष्टया आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और संबंधित ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों ने इस्तीफा भी दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसी को संरक्षण नहीं दिया, बल्कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की है।


आशीष शेलार ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे हिंदू समाज और रामभक्तों की भावनाओं के साथ खड़े होने के बजाय एक विशेष वर्ग के वोटों की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि राम मंदिर और हिंदू जागरण के नाम पर आंदोलन किया जा रहा है तो पहले आंदोलनकारियों को अपने पुराने रुख पर हिंदू समाज से माफी मांगनी चाहिए।


उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन करने वाले उद्धव ठाकरे को पहले कांग्रेस से यह स्वीकार करवाना चाहिए कि भगवान राम के अस्तित्व को नकारने वाला उसका पुराना हलफनामा गलत था। शेलार ने कहा कि इसके बाद ही उन्हें रामभक्ति, रामराज्य और राम मंदिर पर बोलने का नैतिक अधिकार मिलेगा।


उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के संभावित राजनीतिक समीकरण पर टिप्पणी से इनकार करते हुए शेलार ने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत और पारिवारिक विषय है। हालांकि उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने सत्ता का त्याग कर अपने भाई के प्रति आदर्श प्रस्तुत किया था और उद्धव ठाकरे को भी पहले अपने राजनीतिक आचरण पर आत्ममंथन करना चाहिए।

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