राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के पद पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित करें:-राष्ट्रीय चर्मकार संघ के प्रमुख नेता बाबूराव माने।

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मुंबई वार्ता/हरीशचंद्र पाठक

कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाय तो राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के पद पिछड़े वर्ग के समुदाय को नहीं दिए गए हैं। इसके लिए, खुले समूह के पदों को एक निश्चित अंतराल पर पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए। ऐसी जोरदार मांग राष्ट्रीय चर्मकार संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व विधायक बाबूराव माने ने की है।

बता दें कि हाल ही में धारावी के मनोहर जोशी कॉलेज में राष्ट्रीय चर्मकार संघ के पदाधिकारियों और नेताओं के संवाद सम्मेलन का आयोजन किया गया था। जिसमें संवाद सम्मेलन का मार्गदर्शन करते हुए पूर्व विधायक बाबूराव माने ने कहा कि देश को आजाद हुए 75 साल हो गए हैं। कितनी बार अपना मुख्यमंत्री बना? कितनी बार राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल बने हैं? इसलिए, इन पदों को नियमित अंतराल पर आरक्षित किया जाना चाहिए। तभी पांच या दस साल बाद हमारा नंबर लगेगा। महाराष्ट्र में हमारे समाज के सुशील कुमार शिंदे को सिर्फ एक बार मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। वह भी देश को आजादी मिलने के 60-65 साल बाद। इसलिए ये पद आरक्षित होने चाहिए। हमारे पिछड़े वर्ग के समाज के पास ग्राम पंचायतों में सरपंच का पद, कुछ नगर पालिकाओं में महापौर का पद और अन्य में पंचायत समिति के अध्यक्ष का पद है। लेकिन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री के बड़े पदों को खुला रखा गया है।

माने ने कहा कि हमारे समाज के योग्य लोगों को आरक्षण के आधार पर 5-10 साल के बाद नियमित अंतराल पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में बैठने का मौका मिलेगा। माने ने आशा व्यक्त की कि अगर चर्मकार समाज की ताकत वास्तव में इसके लिए खड़ी हो जाए तो ये चीजें भी असंभव नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि महापौर, सरपंच, पंचायत समिति, जिला परिषद अध्यक्ष जैसे छोटे पदों को आरक्षित करके शासक यह मानकर काम कर रहे हैं कि उन्होंने पिछड़े वर्ग के समाज के लिए बहुत बड़ी सेवा की है। हमारे चर्मकार समाज की छोटी-छोटी संस्थाएं और संगठन राज्य के कोने-कोने में काम कर रहे हैं और इन सभी संस्थाओं और संगठनों को एकता दिखानी चाहिए। हमारे चर्मकार समाज के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है। हमें छात्रवृत्ति दिलाने के लिए संघर्ष करना चाहिए, ऐसी अपील बाबूराव माने ने इस संवाद सम्मेलन में बोलते हुए चर्मकार समाज के नेताओं और पदाधिकारियों से की।

इस अवसर पर महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से चर्मकार समाज के नेता और पदाधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद थे। जिसमें राष्ट्रीय चर्मकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष सूर्यकांत गवली, मुंबई अध्यक्ष विलास गोरेगांवकर, महिला राज्य अध्यक्ष शारदाताई नवले, रामभाऊ कदम, विजय घासे, शाहिर संभाजी भगत, अशोक राव अगवाने, वसंत धाड़वे, विठ्ठल वनमोरे, एडवोकेट नारायण गायकवाड़, डॉ. सुधीर मेढेकर (डीन कूपर अस्पताल), गौतम करंडे सेवानिवृत्त (डी.एस.पी.), अशोक सूर्यवंशी, मच्छीगर समाज के एडवोकेट सिद्धनाथ हटारकर, जैसवार समाज के दीपचंद जैसवार रेगर, रेगर समाज के हंसराज रेगर आदि उपस्थित थे।

इस अवसर पर चर्मकार समाज के सभी जाति-जनजाति के प्रमुख नेता एकत्रित हुए तथा इस बात पर चर्चा की कि हमें अपने अधिकार कैसे प्राप्त हो सकते हैं।

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