मुंबई वार्ता/हरीशचंद्र पाठक

सफाई कर्मचारियों के मुद्दे पिछले कई वर्षों से लंबित हैं। राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने एक ठोस आश्वासन दिया कि उन्हें जल्द ही हल किया जाएगा। अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस यूनियन की ओर से आज़ाद मैदान में एक आक्रोश मोर्चा निकाला गया था। हालांकि, पुलिस ने हस्तक्षेप किया और प्रतिनिधिमंडल को शिरसाट से मिलने की व्यवस्था की। उस समय, यूनियन के अध्यक्ष गोविंदभाई परमार ने विस्तृत चर्चा की।


गोविंदभाई परमार के साथ यूनियन के महाराष्ट्र अध्यक्ष घनश्याम डकाह, कार्यकारी अध्यक्ष प्रतापजी निंदाने और मुंबई अध्यक्ष एडवोकेट रवि गवली के नेतृत्व में आजाद मैदान में आक्रोश मोर्चा का आयोजन किया गया था। हालांकि पुलिस के हस्तक्षेप से, इसे रद्द कर दिया गया और अंत में संजय शिरसाट के साथ चर्चा की गई।
इस बीच, केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने भी इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और संजय शिरसाट को एक पत्र लिखा और उनसे सफाई कर्मचारियों के मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की । तदनुसार, शिरसाट ने इन सफाई कामगारों के नेताओं को मोर्चा निकालने के बजाय चर्चा के लिए बुलाया है। ब
ताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय के 1995 के आदेश के नियमों के आधार पर ठेकेदारी प्रथा न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए ठेका पद्धति भगाओ,सफाई कामगार वारस हक बचाओ’ नामक अभियान शुरू किया गया है। यह भी मांग की गई कि सभी विभागों में सफाई कर्मचारियों की भर्ती करके लाड-पागे समिति की रिपोर्ट (12 अगस्त 1975) की सिफारिशों को जल्द से जल्द लागू किया जाए। यह मांग दोहराई गई कि सफाई कर्मचारियों को राज्य सरकार के परिपत्र 1985, 86, 87, 88 के अनुसार मालिकाना हक वाले घर दिए जाएं और जाति प्रमाण पत्र 1960 के अनुसार लागू किया जाए।
दलित मित्र गोविंदभाई परमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में सामाजिक न्याय मंत्री को एक ज्ञापन सौंपा और सफाई कर्मचारियों के मुद्दे पर तुरंत निर्णय लेने की मांग की। इस अवसर पर परमार, के साथ राजेशभाई टाकेकर, एडवोकेट रवि गवली, नवीनचंद्र मकवाना, रघुनाथ जाधव, जीतूभाई रोज, सुनील और कई अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।


