■ मराठी भाषा को पहले पढ़ाया जाना चाहिए और फिर इसे अनिवार्य पाठ्यक्रम बनाया जाना चाहिए।
मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में रिक्शा और टैक्सी चालकों के परमिट और लाइसेंस के लिए मराठी अनिवार्य नहीं है। हर राज्य की अपनी भाषा होती है। इसे अनिवार्य किया जाना चाहिए। लेकिन उससे पहले, अगर मराठी को अनिवार्य करना ही है, तो पहले मराठी पढ़ाने के लिए स्कूल खोले जाने चाहिए और जो लोग मराठी में निपुण नहीं हैं, उन्हें मराठी सिखाई जानी चाहिए। यह बाते समाजवादी विधायक एवं महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष अबू आसिम आज़मी ने कही है।


अबू आसिम आज़मी ने कहा कि हर देश की अपनी भाषा होती है, तो राष्ट्रीय भाषा हिंदी कहां बोली जाएगी? इस देश के हर राज्य की अपनी भाषा है, जैसे महाराष्ट्र में मराठी, केरल में मलयालम, असम में असमिया, लेकिन किसी को भी कोई भाषा बोलने के लिए मजबूर करने की जरूरत नहीं है। अगर आप मराठी सीखना चाहते हैं, तो उन्हें किताबें दें, कक्षाएं लगवाएं, उन पर दबाव न डालें। देश में बेरोजगारी आम बात है। अगर कोई दूसरे राज्य से मुंबई और महाराष्ट्र आता है, तो उसे जीविका कमाने का अधिकार है। हालांकि, सिर्फ मराठी को अनिवार्य बनाना सही नहीं है। रोजगार के अवसर प्रदान करना भी जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर राज्य में मराठी को अनिवार्य किया जाता है, तो इस भाषा को पढ़ाने के लिए कक्षाएं लगाई जानी चाहिए। मराठी के नाम पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। इससे राज्य की छवि भी धूमिल होती है क्योंकि मराठी न जानने वाले निवासियों के खिलाफ कई बार हिंसा की घटनाएं हुई हैं। इसलिए, ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न नहीं होनी चाहिए और ऐसी स्थिति को रोकने के लिए उन्हें राज्य भाषा सिखाई जानी चाहिए और फिर उन्हें लाइसेंस और परमिट प्रदान किए जाने चाहिए।


