मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट अमोल मातेले ने महाराष्ट्र सरकार की ‘लाडकी बहन’ योजना को लेकर तीखा हमला बोला है।


सरकार ने सत्यापन और ई-केवाईसी के नाम पर राज्य की करीब 92 लाख महिलाओं को योजना से बाहर कर दिया, जो महिलाओं के साथ बड़ा विश्वासघात है।यह आरोप राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट अमोल मातेले द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए हैं।
मातेले ने कहा कि चुनाव से पहले महिलाओं के वोट हासिल करने के लिए ‘लाडकी बहन’ योजना का बड़े पैमाने पर प्रचार किया गया, लेकिन अब सरकार ने अपना असली चेहरा दिखा दिया है। उन्होंने कहा कि यह योजना अब ‘लाडकी बहन’ नहीं बल्कि ‘धोखा बहन’ योजना बन गई है।
मातेले ने आरोप लगाया कि सरकार के पास अपने प्रचार और बड़े-बड़े आयोजनों पर खर्च करने के लिए पर्याप्त धन है, लेकिन गरीब और मेहनतकश महिलाओं के खातों में सहायता राशि भेजने की बारी आई तो तकनीकी खामियों और ई-केवाईसी का बहाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले महिलाओं से आवेदन भरवाए गए और अब लाखों आवेदनों को खारिज कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार ने रक्षाबंधन और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के नाम पर महिलाओं की भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल किया है। महंगाई से जूझ रही महिलाओं को 1,500 रुपये की सहायता का भरोसा देकर अंतिम समय में योजना से बाहर करना अन्यायपूर्ण है।
मातेले ने दावा किया कि महाराष्ट्र की महिलाएं इस कथित अपमान और आर्थिक धोखे को नहीं भूलेंगी तथा आने वाले विधानसभा चुनाव में सरकार को इसका जवाब देंगी।
सरकार की ओर से इस संबंध में तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


