मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में बढ़ती सूखे जैसी स्थिति के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को लातूर के प्रभावित इलाकों का दौरा किया और खेतों में पहुंचकर फसल नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सूखे की गंभीर स्थिति को लेकर पूरी तरह गंभीर है और राहत कार्यों के लिए निधि की कमी नहीं होने दी जाएगी।


किसानों को तत्काल राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए केंद्र से मिलने वाली सहायता का इंतजार नहीं किया जाएगा और बाद में राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष यानी एनडीआरएफ के नियमों के तहत केंद्र से सहायता मांगी जाएगी।
फडणवीस ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में सूखे की औपचारिक अधिसूचना शनिवार तक जारी किए जाने की योजना है। साथ ही पीने के पानी और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था को लेकर भी सरकार ने आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को तत्काल राहत पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसानों के लिए चल रही कर्जमाफी योजना जारी रहेगी और राहत कार्यों के लिए अतिरिक्त निधि उपलब्ध कराई जाएगी। लगातार बारिश नहीं होने से मराठवाड़ा के कई हिस्सों में खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा है, जबकि पीने के पानी और पशुओं के चारे की समस्या भी गंभीर होती जा रही है।
■ मराठवाड़ा के लिए दीर्घकालीन जल योजना
फडणवीस ने मराठवाड़ा के स्थायी जल संकट को दूर करने के लिए अतिरिक्त जल उपलब्ध कराने की योजना की भी जानकारी दी। सरकार कोल्हापुर और सांगली क्षेत्र के अतिरिक्त पानी को उजनी बांध तक लाने और वहां से मराठवाड़ा की ओर पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है। इस परियोजना को लेकर विश्व बैंक के साथ चर्चा चल रही है और इसका विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन दिसंबर तक तैयार होने की उम्मीद है।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने मराठवाड़ा वाटर ग्रिड परियोजना को लेकर पिछली सरकार पर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के दीर्घकालीन जल संकट के समाधान के लिए जल infrastructure को प्राथमिकता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी अकोला और बुलढाणा के प्रभावित खेतों का दौरा कर किसानों से मुलाकात करने वाले हैं। राज्य सरकार ने विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का प्रत्यक्ष आकलन शुरू किया है, जिसके आधार पर आगे राहत एवं पुनर्वास संबंधी कदम उठाए जाएंगे।


