श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मशहूर वकील विनोद कुमार पाठक ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र के माध्यम से लोकपाल द्वारा लगभग ₹70 लाख मूल्य की एक लक्ज़री बीएमडब्ल्यू कार का उपयोग किए जाने की शिकायत की। उन्होंने कहा कि इससे नागरिकों के मन में सादगी, लोक जवाबदेही और लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 की नैतिक भावना के पालन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।


वकील विनोद पाठक ने पत्र के माध्यम से कहा कि,”लोकपाल संस्था की स्थापना शासन में जनता के विश्वास को पुनर्स्थापित करने और नैतिक आचरण व सादगी का प्रतीक बनने के उद्देश्य से की गई थी। किंतु इस प्रकार की विलासिता, भले ही कानूनी रूप से अनुमत हो, संविधान और नैतिक अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है।”
उन्होंने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि :-
1. लोकपाल सचिवालय के व्यय मानकों एवं संसाधन आवंटन की समीक्षा करने का निर्देश दें, ताकि वित्तीय अनुशासन और सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
2. संविधान के अनुच्छेद 53 तथा अनुच्छेद 74 के तहत उचित दिशा-निर्देश जारी करें, जिससे लोकपाल सहित सभी सार्वजनिक संस्थाएँ सादगी, पारदर्शिता और नैतिक मर्यादा का पालन करें।
3. लोकपाल सचिवालय में वाहनों की खरीद एवं उपयोग की ऑडिट कराने का आदेश दें, ताकि वित्तीय अनुशासन और लोक नैतिकता के सिद्धांतों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके।
4. लोकपाल और उसके अधिकारियों के लिए एक “नैतिक आचरण संहिता (Code of Ethical Conduct)” तैयार करने हेतु प्रोत्साहित करें, जिससे लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 की भावना के अनुरूप सार्वजनिक आचरण सुनिश्चित हो।
संवैधानिक एवं विधिक आधार:
अनुच्छेद 14 – विधि के समक्ष समानता।अनुच्छेद 38 – राज्य का दायित्व कि वह सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय पर आधारित सामाजिक व्यवस्था स्थापित करे।लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 की धारा 12(3) – लोकपाल को शासन में ईमानदारी और पारदर्शिता को बढ़ावा देने हेतु कार्य करना चाहिए।
● जन भावना:
भारत की जनता चाहती है कि लोकपाल संस्था सादगी और ईमानदारी का प्रतीक बने — न कि विलासिता का।
उन्होंने यह भी निवेदन किया कि कृपया उचित कार्रवाई कर यह सुनिश्चित करें कि लोकपाल संस्था सादगी, नैतिक अनुशासन और पारदर्शिता का प्रतीक बनी रहे, जिससे जनता का विश्वास इस सर्वोच्च भ्रष्टाचार-निरोधक संस्था पर सुदृढ़ हो।


