मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना के बीच एक बार फिर राजनीतिक तनाव सामने आया है। शिवसेना के मंत्री प्रताप सरनाईक ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और ‘वोटर फ्रॉड’ को लेकर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब दोनों दल सत्ता में साझेदार हैं और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।


सरनाईक के आरोपों का केंद्र मीरा-भायंदर क्षेत्र की मतदाता सूची है। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर बीजेपी और शिवसेना के बीच पहले से मौजूद राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को और उजागर कर दिया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों दलों के स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि सरनाईक के हालिया बयान केवल मतदाता सूची के मुद्दे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी एक बड़ी वजह है।
■ बीजेपी विधायक से पुरानी राजनीतिक टक्कर
रिपोर्ट के अनुसार, सरनाईक की इस लड़ाई का एक महत्वपूर्ण पहलू बीजेपी विधायक नरेश मेहता के साथ उनकी लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है। मीरा-भायंदर इलाके में दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच राजनीतिक प्रभाव और संगठनात्मक वर्चस्व को लेकर खींचतान रही है। ऐसे में मतदाता सूची का विवाद दोनों दलों के बीच स्थानीय राजनीतिक संघर्ष का नया केंद्र बन गया है।
■ महायुति के लिए क्यों अहम है मामला?
बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना महाराष्ट्र में महायुति सरकार का हिस्सा हैं। ऐसे में सरकार के दो सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से मतदाता सूची जैसे संवेदनशील मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप होना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या स्थानांतरण को लेकर होने वाले विवाद सीधे चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए सरनाईक द्वारा ‘वोटर फ्रॉड’ का मुद्दा उठाए जाने से स्थानीय चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल और गरमाने की संभावना है।
■ सिर्फ मतदाता सूची नहीं, शक्ति प्रदर्शन भी?
राजनीतिक हलकों में सरनाईक के रुख को बीजेपी के साथ स्थानीय स्तर पर शक्ति संतुलन की लड़ाई से भी जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट में दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के हवाले से संकेत दिया गया है कि यह विवाद वर्षों से चली आ रही स्थानीय राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की पृष्ठभूमि में सामने आया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि महायुति के भीतर राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर भले ही गठबंधन कायम हो, लेकिन स्थानीय चुनावी राजनीति में बीजेपी और शिवसेना के हित कई जगह एक-दूसरे से टकरा सकते हैं।
फिलहाल मतदाता सूची को लेकर सरनाईक की आपत्तियों ने मीरा-भायंदर की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में बीजेपी-शिवसेना के बीच यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।


