मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में जारी SIR (Special Intensive Revision) अभियान के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूची से हटाए जाने के मुद्दे पर महाराष्ट्र कांग्रेस ने दावे-आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने की मांग की है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एडवोकेट संदेश कोंडविलकर ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर दावे-आपत्तियां दाखिल करने की अवधि 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाने, सुनवाई प्रक्रिया को आसान बनाने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।


कांग्रेस के अनुसार, महाराष्ट्र में SIR अभियान के तहत कुल 9 करोड़ 78 लाख 54 हजार 49 मतदाताओं में से 2 करोड़ 6 लाख 88 हजार 487 मतदाताओं, यानी 21.14 प्रतिशत, के नाम प्रारूप मतदाता सूची से ‘ASDD – Uncollectable’ के रूप में बाहर किए गए हैं। वहीं प्रारूप मतदाता सूची में 7 करोड़ 71 लाख 65 हजार 562 मतदाताओं (78.86 प्रतिशत) को शामिल किया गया है। इसमें Anomalies और Unmapped मतदाता भी शामिल हैं।
■ 30 नवंबर तक मिले दावे-आपत्तियां दाखिल करने का समय
कांग्रेस ने कहा है कि 31 अगस्त से 30 सितंबर तक की मौजूदा अवधि पर्याप्त नहीं है। इसी दौरान गणेशोत्सव होने के कारण बड़ी संख्या में नागरिक अपने गांव जाते हैं। ऐसे में मतदाताओं को आवश्यक दस्तावेज जुटाने और दावे-आपत्तियां दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय मिलना मुश्किल है। इसलिए समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई जाए।
■ कांग्रेस की प्रमुख मांगें
Anomalies और Unmapped मतदाताओं की बूथवार सूची जारी हो: जिन मतदाताओं को नोटिस देकर सुनवाई के लिए बुलाया जाना है, उनकी बूथवार सूची तत्काल जारी की जाए और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई जाए।
नोटिस व्यक्तिगत रूप से दिया जाए: गणना प्रपत्र जमा करने वाले मतदाताओं को केवल WhatsApp के माध्यम से नोटिस न भेजकर उनसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर नोटिस दिया जाए।
मतदान केंद्रों पर सुनवाई की व्यवस्था हो: प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में केवल 3-4 स्थानों पर सुनवाई करने के बजाय संबंधित मतदान केंद्रों पर ही सुनवाई की व्यवस्था की जाए, ताकि मतदाताओं को परेशानी न हो।
मराठी-इंग्लिश नाम के मामूली अंतर को Anomaly न माना जाए: मराठी और अंग्रेजी में नाम की स्पेलिंग में मामूली अंतर होने पर मतदाता को नोटिस देने के बजाय उसका नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाए। साथ ही Anomalies में सुधार के लिए स्पष्ट नियमावली जारी की जाए।
ASDD मतदाताओं की सरल तरीके से जांच हो: ASDD सूची में शामिल मतदाता दोबारा दावा दाखिल करता है तो BLO या सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी के माध्यम से उसकी जांच की जाए। ऐसे मतदाताओं को अनावश्यक रूप से नोटिस देकर सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाए।
■ नए मतदाताओं के लिए अलग कक्ष बनाया जाए
नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए अलग कक्ष स्थापित किया जाए और वहां फॉर्म-6, घोषणा पत्र तथा फॉर्म-8 उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही BLA एक बार में कितने आवेदन जमा कर सकते हैं, इस संबंध में भी स्पष्टता दी जाए।
आवेदन खारिज होने पर दो दिन में लिखित आदेश मिले: सुनवाई के बाद यदि किसी मतदाता का आवेदन खारिज किया जाता है तो उसे कारणों सहित लिखित निर्णय दो दिन के भीतर उपलब्ध कराया जाए, ताकि वह समय रहते अपील कर सके।
वरिष्ठ नागरिकों को प्राथमिकता दी जाए: जिन वरिष्ठ नागरिकों को सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया गया है, उनकी सुनवाई को प्राथमिकता दी जाए।
मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं की दोबारा जांच हो: गणना प्रपत्र और आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद प्रारूप सूची में मृत या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम पाए जाने पर उनकी दोबारा गहन जांच की जाए।
■ राजनीतिक दलों को नियमित जानकारी देने की मांग
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन आयोग के निर्देशों का BLO और सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारियों द्वारा पालन नहीं किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। ऐसे में पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को आवश्यक जानकारी नियमित रूप से उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
एडवोकेट संदेश कोंडविलकर ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से आग्रह किया है कि एक भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से वंचित न हो और मतदाता सूची तैयार करने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से संचालित हो। इसके लिए कांग्रेस की ओर से रखी गई सभी मांगों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।


