श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

बॉम्बे हाई कोर्ट ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के पूर्व जोनल निदेशक समीर वानखेड़े को बड़ी अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया है कि उनकी याचिका पर अंतिम फैसला होने तक उन्हें चल रही विभागीय जांच में पूछताछ के लिए तलब नहीं किया जाएगा।


न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने गुरुवार को वानखेड़े की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि मामले के अंतिम निपटारे तक यह अंतरिम संरक्षण जारी रहेगा।


2008 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी समीर वानखेड़े ने वर्ष 2024 में हाई कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने एनसीबी द्वारा दो मादक पदार्थ मामलों की जांच में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विभागीय नोटिसों को चुनौती दी है।
इन विभागीय जांचों में से एक, वर्ष 2020 में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद एनसीबी द्वारा की गई जांच से संबंधित है।
एनसीबी का कहना है कि विभागीय जांच दो गुमनाम शिकायतों के आधार पर शुरू की गई थी, जिनमें जांच प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे।
वहीं, अपनी याचिका में समीर वानखेड़े ने दावा किया है कि उनके खिलाफ की जा रही विभागीय जांच राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और इसे उन्होंने “बदले की कार्रवाई” (Act of Vengeance) करार दिया है। फिलहाल हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अंतिम सुनवाई तक उन्हें विभागीय पूछताछ के लिए तलब नहीं किया जा सकेगा।


