साइबर सुरक्षा नियंत्रण प्रणाली में महाराष्ट्र की पहल– मंत्री ॲड. आशिष शेलार।

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■ ‘रिंग द बेल फॉर सिक्योरिटी’ अभियान का शुभारंभ.

मुंबई वार्ता संवाददाता

डिजिटल इंडिया और डिजिटल लेन-देन के दौर में महाराष्ट्र आज दुनिया के लिए एक आदर्श राज्य बनकर उभरा है। साइबर सुरक्षा नियंत्रण प्रणाली स्थापित करने में महाराष्ट्र ने अग्रणी भूमिका निभाई है, ऐसा मत सूचना प्रौद्योगिकी एवं सांस्कृतिक कार्य मंत्री ॲड. आशिष शेलार ने व्यक्त किया।

डिजिटल सुरक्षा को प्रोत्साहन देने और सभी के लिए सुरक्षित साइबर लेन-देन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित ‘रिंग द बेल फॉर सिक्योरिटी’ अभियान का शुभारंभ आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में मंत्री ॲड. आशिष शेलार के हाथों हुआ।

इस अवसर पर मंत्री शेलार ने कहा कि 2016 में प्रारंभ किए गए महाराष्ट्र साइबर विभाग की पहल के साथ-साथ राज्य सरकार ने ‘गोल्डन डेटा प्रोजेक्ट’ भी शुरू किया है। इस परियोजना में 12 करोड़ प्रमाणित नागरिकों का डेटा दर्ज किया गया है। इससे नागरिकों को हर लेन-देन के लिए अलग-अलग पासवर्ड या प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं होगी। यह परियोजना साइबर सुरक्षा के लिए एक बड़ी ताकत सिद्ध होगी।

मंत्री शेलार ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक भी इसका प्रसार होना जरूरी है। इसके लिए उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थान और शासन को मिलकर प्रयास करने होंगे।

“यह डिजिटल रेजिलियन्स सिस्टम बनाने का सही समय है – उद्योग क्षेत्र को निवेश करना होगा, शैक्षणिक संस्थानों को पाठ्यक्रम तैयार करने होंगे, शासन को मजबूत व्यवस्था बनानी होगी और नागरिकों को भी जागरूक होना पड़ेगा,” शेलार ने कहा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आज के समय में डिजिटल लेन-देन, ई-गवर्नेंस और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में साइबर सुरक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है, जितनी सीमा सुरक्षा। वर्तमान में भारत में 70 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता और 120 करोड़ मोबाइल उपभोक्ता हैं। पिछले पांच वर्षों में साइबर अपराधों में 400 प्रतिशत वृद्धि हुई है। देश में औसतन प्रति मिनट 702 साइबर खतरे दर्ज किए जाते हैं और हर सेकंड 12 नए साइबर हमलों का खतरा सामने आता है। इसलिए नागरिकों की सुरक्षा के लिए मजबूत और टिकाऊ साइबर सुरक्षा व्यवस्था खड़ी करना समय की आवश्यकता है।

■ “साइबर कोविड से बचाव के लिए जरूरी है साइबर स्वच्छता”– प्रधान सचिव ब्रिजेश सिंह

सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय के प्रधान सचिव तथा महासंचालक ब्रिजेश सिंह ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल संस्थाओं की नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। ‘साइबर कोविड’ से बचाव के लिए हर नागरिक को साइबर स्वच्छता अपनानी चाहिए।

उन्होंने कहा, “एआई के युग में डेटा सबसे मूल्यवान संपत्ति है। इसलिए सभी को अपने डेटा की सुरक्षा करनी चाहिए। अति-साझाकरण से बचें, सोशल मीडिया पर अनावश्यक जानकारी साझा न करें और ‘जिओस्पाय’ जैसे एल्गोरिद्म से सावधान रहें।”

इस कार्यक्रम में सेबी के कार्यकारी निदेशक अविनाश पांडे, विभिन्न उद्योग क्षेत्रों के प्रतिनिधि तथा वरिष्ठ शासकीय अधिकारी उपस्थित थे।क्या आप चाहेंगे कि मैं इस प्रेस विज्ञप्ति का एक संक्षिप्त बुलेट-पॉइंट संस्करण भी हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में तैयार कर दूँ ताकि मीडिया उपयोग के लिए जल्दी साझा किया जा सके?

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