मुंबई वार्ता संवाददाता

अमेरिका के न्याय विभाग ने कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को लेकर बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि वह गुजरात की हाई सिक्योरिटी साबरमती जेल में बंद रहते हुए भी व्हाट्सऐप कॉल और अन्य इंटरनेट आधारित संचार माध्यमों का इस्तेमाल कर आपराधिक गतिविधियों का संचालन कर रहा था।
अमेरिकी एजेंसियों के अनुसार, दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच बिश्नोई ने जेल के भीतर से कई कॉल और संदेश भेजे तथा अमेरिका के लॉस एंजिल्स और थाउजेंड ओक्स में मौजूद लोगों से करीब 50 लाख डॉलर (करीब 41 करोड़ रुपये) की रंगदारी वसूलने की कोशिश की।


अमेरिकी न्याय विभाग ने लॉरेंस बिश्नोई और उसके कनाडा में छिपे करीबी सहयोगी गोल्डी बराड़ पर प्रतिबंधित खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आदेश देने का भी आरोप लगाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिश्नोई का सिंडिकेट धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक हस्तियों को निशाना बनाकर समाज में भय का माहौल तैयार करता है और इसी के जरिए रंगदारी का नेटवर्क संचालित करता है।


■ वकील ने अमेरिकी दावों पर उठाए सवाल
लॉरेंस बिश्नोई की वकील रजनी खत्री ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनका मुवक्किल वर्ष 2023 से साबरमती जेल में एकांत कारावास में बंद है और 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी में रहता है। उन्होंने कहा कि यदि वह जेल से व्हाट्सऐप के जरिए रंगदारी चला रहा था तो संबंधित एजेंसियों को इसके ठोस और प्रमाणिक सबूत सार्वजनिक करने चाहिए।
वकील के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बिश्नोई के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 303 लागू कर रखी है, जिसके तहत उसे जेल से बाहर ले जाने पर प्रतिबंध है। वह अदालत की सुनवाई में भी केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होता है और केवल अपनी कानूनी टीम से ही मुलाकात कर सकता है।
रजनी खत्री ने यह भी दावा किया कि लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ दर्ज मामलों में से 40 मामलों में वह बरी या दोषमुक्त हो चुका है। वर्ष 2022 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट के अनुसार उसके खिलाफ दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और चंडीगढ़ समेत विभिन्न राज्यों में कुल 84 मामले दर्ज हैं।
■ जेल से गैंग ऑपरेट करने का आरोप
अमेरिकी न्याय विभाग के आरोप राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की वर्ष 2022 की चार्जशीट से भी मेल खाते हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि लॉरेंस बिश्नोई ने जेल के भीतर तस्करी के जरिए पहुंचाए गए प्रतिबंधित मोबाइल फोन और VoIP उपकरणों का इस्तेमाल कर राजनीतिक हत्याओं, फायरिंग, जबरन वसूली, मादक पदार्थों की तस्करी और मानव तस्करी जैसी आपराधिक गतिविधियों का संचालन किया।
एनआईए ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि बिश्नोई कई वर्षों से जेल के भीतर से ही अपने पूरे गैंग का संचालन कर रहा है और उसने लंबे समय से किसी मामले में जमानत की अर्जी तक दाखिल नहीं की। हालांकि, उसकी वकील का कहना है कि इतने अधिक मामलों के कारण कोई भी उसकी जमानत का बॉन्ड भरने के लिए आगे नहीं आता, इसलिए उसने जमानत की कोशिश नहीं की।
■ मूसेवाला हत्याकांड का भी उल्लेख
एनआईए की चार्जशीट में पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या की साजिश का भी जिक्र किया गया है। एजेंसी के अनुसार, हत्या की योजना के दौरान लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया, मनप्रीत और अन्य आरोपी अलग-अलग जेलों में बंद थे, लेकिन इसके बावजूद वे कनाडा में बैठे गोल्डी बराड़ के लगातार संपर्क में थे। जांच के मुताबिक, गोल्डी बराड़ ने ही शूटरों को हत्या को अंजाम देने का निर्देश दिया था।
■ दाऊद इब्राहिम से की गई तुलना
एनआईए का कहना है कि बिश्नोई सिंडिकेट द्वारा जबरन वसूली से जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा कनाडा, अमेरिका, दुबई, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया में मौजूद सहयोगियों और परिवार के सदस्यों तक पहुंचाया जाता है। एजेंसी का आरोप है कि इस धन का इस्तेमाल खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को वित्तीय सहायता देने में भी किया जाता है। इसी आधार पर एनआईए ने अपनी चार्जशीट में लॉरेंस बिश्नोई की कार्यशैली की तुलना अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से की थी।
फिलहाल अमेरिकी न्याय विभाग के आरोपों पर भारतीय एजेंसियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जबकि लॉरेंस बिश्नोई की कानूनी टीम ने इन दावों को सबूतों के अभाव में खारिज किया है।


