मुंबई वार्ता संवाददाता

लोकसभा और विधानसभा चुनाव में महाविकास आघाड़ी ने एकत्र होकर चुनाव लड़ा था। लोकसभा में बड़ी सफलता मिली, लेकिन विधानसभा में हार का सामना करना पड़ा। बिहार चुनाव में कांग्रेस और राजद के साथ 10 दलों का गठबंधन था, मतचोरी की पृष्ठभूमि में वहाँ भी नतीजे अलग ही आए। अब स्थानीय स्वराज संस्थाओं के चुनाव स्वतंत्र रुप से लड़ने की कार्यकर्ताओं की भावना है और इसका स्वागत करना चाहिए। सभी दलों को धैर्य से काम लेना चाहिए, ऐसा महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।


बुलढाणा में पत्रकारों से बात करते हुए प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि भाजपा के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा संघर्ष जारी है। कांग्रेस की विचारधारा को समाप्त करने के लिए ही आरएसएस की स्थापना हुई थी। आज देश में भाजपा और कांग्रेस दो भिन्न विचारधाराएँ हैं, और यह पुरानी वैचारिक लड़ाई है। मुट्ठीभर लोगों को अमीर बनाने का जो भाजपा-आरएसएस का दृष्टिकोण है, वह कांग्रेस को स्वीकार नहीं है। इसके विरोध में सबसे बड़ा रणशिंग कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने फूंका है। कांग्रेस का वैचारिक संघर्ष भाजपा और पूंजीपतियों के खिलाफ है।


राहुल गांधी की इस लड़ाई में अन्य दलों को भी साथ देना चाहिए, ऐसा आवाहन करते हुए सपकाल ने कहा कि हर दल की अपनी राय होती है,यह बात उद्धव ठाकरे जी ने भी कही है।इंडिया गठबंधन में कोई नया दल शामिल होना हो तो उस पर चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर होती है। उसके लिए प्रस्ताव आना चाहिए, और जब प्रस्ताव ही नहीं है तो चर्चा किस बात की?


वंचित बहुजन आघाड़ी के साथ गठबंधन पर बोलते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि गठबंधन बनाने का अधिकार कांग्रेस ने अपने स्थानीय नेताओं को दिया था, और वंचित ने भी यही भूमिका अपनाई थी। उसी आधार पर दोनों दलों के जिला स्तर के नेताओं ने चर्चा कर निर्णय लिया था। बाद में किसी कारण से चर्चा में बाधा आई होगी तो उसका मध्यम मार्ग निकाला जा सकता है। दो-दो नामांकन दाखिल होना टाला जा सकता था।
कांग्रेस और वंचित दलों के बीच गठबंधन हो, यह दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं की भावना है, और गठबंधन घोषित हो चुका है। इसे तोड़ने का सवाल ही नहीं है। अब इस परिस्थिति से आगे बढ़ने के लिए कांग्रेस सकारात्मक कदम उठाएगी।संविधानवादी सभी दलों को एकजुट होकर शिव, शाहू और फुले की लढाई को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, और इसके लिए हम प्रयास करेंगे, ऐसा भी हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।


