■ वर्ली की आरक्षित जमीन बिल्डर को देने का मामला।
मुंबई वार्ता संवाददाता

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने आरोप लगाया है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद अधिकारियों के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि वरली में करीब 27 हजार वर्ग मीटर आरक्षित भूमि नियमों को दरकिनार कर एक विकासक को दिए जाने के मामले में कोर्ट ने दस्तावेजों में हेरफेर के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।


रोहित पवार ने मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस मामले को लेकर उन्होंने एसआरए (स्लम पुनर्विकास प्राधिकरण) को पत्र दिया है और जल्द ही मुंबई पुलिस आयुक्त से भी मुलाकात करेंगे।
■ एसआईआर प्रक्रिया पर भी गंभीर आरोप
रोहित पवार ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के लिए काम करने वाले कुछ लोग भाजपा के कार्यकर्ता हैं। उनके अनुसार, भाजपा द्वारा तैयार किए गए एक ऐप के माध्यम से मतदाताओं की राजनीतिक पसंद की जानकारी जुटाई जा रही है। इसके बाद सूची लेकर बीएलओ के पास जाकर एसआईआर की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थक मतदाताओं के दस्तावेज पूरे कराने में मदद की जा रही है, जबकि विरोधी विचारधारा वाले मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। हालांकि, ये रोहित पवार द्वारा लगाए गए आरोप हैं।
एसआरए में अधिकारियों और विकासकों की मिलीभगत का आरोप
रोहित पवार ने आरोप लगाया कि कुछ बड़े विकासकों को छोड़कर कई छोटे-बड़े विकासकों के साथ संबंधित अधिकारी कथित तौर पर कंत्राट और साझेदारी के माध्यम से आर्थिक लाभ कमाते हैं। उन्होंने कहा कि एसआरए की स्थापना गरीबों को घर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हुई थी, लेकिन कुछ अधिकारियों के माध्यम से इसकी मूल भावना को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इसके पीछे किसी बड़े राजनीतिक व्यक्ति का हाथ होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। रोहित पवार ने एसआरए में उचित भर्ती प्रक्रिया की आवश्यकता पर जोर देते हुए आरोप लगाया कि बिना परीक्षा के कुछ लोगों को विभाग में लाया गया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कल्याणकर ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो इससे यह सवाल उठेगा कि वे भी इस पूरे मामले में शामिल हैं या नहीं।
■ महाराष्ट्र में ढाई करोड़ मतदाता कम होने की आशंका का दावा
रोहित पवार ने दावा किया कि महाराष्ट्र में करीब 2.5 करोड़ मतदाताओं के नाम कम होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है या जो राज्य से बाहर चले गए हैं, उनके नाम हटाना उचित है, लेकिन अन्य मतदाताओं के नामों का क्या होगा, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया केवल उनके विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि भाजपा के सहयोगी दलों के निर्वाचन क्षेत्रों में भी ऐसे बदलाव किए जा रहे हैं। उन्होंने 2029 के चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा द्वारा अभी से इसकी तैयारी की जा रही है।
रोहित पवार ने स्पष्ट किया कि बीएलओ सरकारी अधिकारी होता है, जबकि बीएलए राजनीतिक दल का प्रतिनिधि होता है। उन्होंने कहा कि महाविकास आघाड़ी की ओर से सभी दलों ने मिलकर बीएलए नियुक्त किए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया से यह संकेत मिलता है कि भाजपा अपने ही सहयोगी दलों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
■ मुख्यमंत्री के अधिकार बढ़ने पर भी निशाना
रोहित पवार ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अब मुख्यमंत्री के पास किसी भी मंत्री के फैसले को बदलने के कानूनी अधिकार आ गए हैं। उन्होंने दावा किया कि पहले भी मंत्रियों के फैसलों को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था, लेकिन अब दस्तावेजों के आधार पर यह स्पष्ट हो गया है कि मुख्यमंत्री कई मामलों में अंतिम निर्णय ले सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अजित पवार के नेतृत्व वाला राष्ट्रवादी कांग्रेस पक्ष और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला शिवसेना गुट इस स्थिति को कितने समय तक स्वीकार करता है।


