श्रीश उपाध्याय/ मुंबई वार्ता

अंधेरी पश्चिम में मिल्लत नगर और गोरेगांव पश्चिम में भगत सिंह नगर के बीच एक 500 मीटर लंबे पुल का निर्माण पिछले दो साल से अटका हुआ है. महानगर पालिका अभी भी उच्च न्यायालय से मंजूरी का इंतजार कर रही है. इस काम में सबसे बड़ी चुनौती भगत सिंह नगर में बसे ढाई हजार परिवारों को पुनर्वासित करना है.


मनपा के रिकॉर्ड के अनुसार, ओशिवारा क्रीक पर 500 मीटर लंबे केबल-स्टेड पुल को 2022 के अंत में मंजूरी दी गई थी. 418.35 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले छह लेन के पुल का उद्देश्य न्यू लिंक रोड पर ट्रैफिक की समस्या को कम करना था. यह पुल अंधेरी लोखंडवाला से गोरेगांव जाने वाले वाहन चालकों के लिए एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगा. मिल्लत नगर में मस्जिद अल सलाम चौक से पुल शुरू होगा और भगत सिंह नगर में समाप्त होगा. काम शुरू होने पर इस परियोजना के पूरा में 4 वर्ष का समय लगने की उम्मीद है.
पिछले दो सालों में बीएमसी को सभी ज़रूरी पर्यावरण मंज़ूरियाँ मिल गई हैं, लेकिन उसे अभी भी बॉम्बे हाईकोर्ट से अंतिम मंज़ूरी का इंतज़ार है. बीएमसी अधिकारियों का कहना है कि मामले की सुनवाई जल्द ही होगी. उन्होंने यह भी बताया कि भगत सिंह नगर का उत्तरी हिस्सा सड़क पर है और लगभग 450 ढाँचों ने मार्ग को अवरुद्ध कर रखा है . इसके अलावा जिस इलाके में नई सड़क जुड़ेगी, वहाँ लगभग 1,600 अतिरिक्त ढाँचे हैं.
अतिरिक्त नगर आयुक्त अभिजीत बांगर ने पुष्टि की है कि इलाके में झुग्गियाँ हैं और उन्हें पुनर्वासित किए बगैर पुल पर काम शुरू नहीं किया जा सकता है.
इस परियोजना के लिए सड़क का प्रस्ताव वर्ष 1991 और वर्ष 2024 दोनों विकास योजनाओं में था. बीएमसी ने एलईडी लाइट लगाकर पुल को बांद्रा-वर्ली सी-लिंक की तरह एक पर्यटक आकर्षण के रूप में विकसित करने की योजना भी बनाई है.
स्थानीय नागरिक पुल परियोजना में देरी की जाँच की माँग कर रहे हैं.
आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने इस मामले के बारे मे पूछने पर कहा कि ,”किसी भी परियोजना को मंज़ूरी देने से पहले रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर किया जाना चाहिए. दो हज़ार से ज़्यादा झुग्गियों का पुनर्वास एक लंबी प्रक्रिया है. इस तरह की देरी से सिर्फ़ परियोजना की लागत बढ़ती है. यह खराब नियोजन का एक उदाहरण है जिसकी जांच की आवश्यकता है.”


