सुरेश मिश्र /कवि/मुंबई वार्ता
हमारे देश में राजनीति और लोकतंत्र की हालत अजीबो-गरीब है।मतलब अजीब तरह की गरीबी है।हर जगह कुर्सी का खेल चल रहा है.

इहां राजनीति बड़ी बेइमान बा, *देश परेसान बा न।
कुर्सी के बा सगरा खेला,झूठ के लगल बा मेला,
जहवां देखा जाति धरम कइ दुकान बा,देश परेसान बा न।
भ्रष्ट चोरवन क ढाल,बनिके काटइं खूब माल,
सीधे-सीधे मनई क त पिंडदान बा, देश परेसान बा न।
जब भी आवेला चुनाव,नेता घूमइं गांव-गांव,
पांच बरिस तक न केहू के ठेकान बा,देश परेसान बा न।
खरी लागे चाहे खोट,एनके चाही खाली वोट,
सब क ख्वाब भले ही लहूलुहान बा,देश परेसान बा न।
चलइ लिट्टी चोखा खेल,जाति सम्मेलन अलेल,
कल जे लात खइलेसि आजु ऊ भगवान बा ,देश परेसान बा न।
रोजगार अउ महंगाई,बाबू हम सबन क खाई,
का बताई फिनि चुनउवा नजदिकान बा,देश परेसान बा न।
इहां राजनीति बड़ी बेइमान बा *देश परेसान बा न।


