मुंबई वार्ता

मुलुंड में श्री चिन्मय पादुका महोत्सव 5 से 11 नवंबर तक मनाया गया. गत 51 साल से लगातार यह महोत्सव मनाया जा रहा है।
मुंबई के मुलुंड (प) में सद्गुरु संचारेश्वर पाचलेगावकर महाराज ने मुक्तेश्वर आश्रम की स्थापना की है, जहां भगवान शंकर की अत्यंत सुंदर, मनमोहक और प्रसन्न चतुर्भुज मूर्ति उनकी करकमलों से स्थापित की गई है। इस शिवमूर्ति के एक ओर गोपाल कृष्ण की प्रतिमा और एक चांदी की दत्त मूर्ति भी है।


इस आश्रम की विशेषता है कि यहां पर सद्गुरु द्वारा आविर्भूत की गई चिन्मय पादुका हैं। खामगांव के मुक्तेश्वर आश्रम में श्री के तपःसामर्थ्य से प्रकट हुई निर्गुण पादुकाएँ हैं। चिन्मय पादुका के बारे में बहुत कम भक्त जानते हैं।
‘चिन्मय’ शब्द का अर्थ है चैतन्य। ऐसे सत्य तत्व का आनंदरूप अधिष्ठान चित्त रूप या चिन्मय रूप है। और यही हैं वे चिन्मय पादुका — भगवान शंकर का अधिष्ठान। ये पादुका स्वयंभू हैं, सद्गुरु श्री संचारेश्वर महाराज को ये प्रत्यक्ष भगवान से प्राप्त हुई हैं। ये चिन्मय पादुका बनाई या स्थापित नहीं की गई हैं, बल्कि प्रकट हुई हैं,इसीलिए मुंबई के मुलुंड में स्थित मुक्तेश्वर आश्रम का महत्व अपार, अगम्य और शब्दों से परे है।
जहां सद्गुरु ने भक्तों के लिए इहलोक और परलोक में सुख प्राप्ति के उद्देश्य से निराकार तत्व को चरण पादुका रूप में प्रकट किया, वह दिन कार्तिक शुक्ल दशमी काथा। आज भी आश्रम में इस तिथि को चिन्मय पादुका महोत्सव मनाया जाता है। सद्गुरु श्री संचारेश्वर महाराज सगुण रूप में रहते हुए स्वयं इस उत्सव में अनुष्ठान किया करते थे।ढोल-ताशों की गूंज, छत्र-चंवर, भालदार और चोपदार के राजसी वैभव के साथ पालकी में श्रीदत्त मूर्ति की परिक्रमा, और भव्य रथ में विराजमान पूज्य श्री का भव्य तैलचित्र! मुलुंड क्षेत्र का आकाश गूंजा देने वाला दत्त नाम का जयघोष, और जहां-जहां से यह शोभायात्रा गुजरी वहां के भक्तों द्वारा पुष्पवर्षा की गई।
ऐसी मान्यता है कि श्री दत्त प्रभु की पालकी का मार्ग सालभर भक्तों को प्रतीक्षा में रखता है। मान्यता है कि दत्त पालकी के नीचे से गुजरने पर कई मानसिक रोग समाप्त हो जाते हैं।
51वें वर्ष के चिन्मय पादुका महोत्सव समारोह में वरिष्ठ पत्रकार और सूचना के अधिकार के विशेषज्ञ कार्यकर्ता माननीय अनिल गलगली विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। स्थानीय नगरसेवक प्रकाश गंगाधरे और स्थानीय विधायक मिहिर कोटेचा भी समारोह में मौजूद थे। माहुल स्थित दत्त माऊली आश्रम के परम पूज्य दत्तानंद स्वामी ने भी इस अवसर पर पधार कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अनिल गलगली ने श्री पाचलेगावकर महाराज के कार्यों की सराहना की और साथ ही सूचना के अधिकार के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने पर जोर दिया।


