श्री वेंकटेश देवस्थान में सप्त दिवसीय ‘श्री वसंतोत्सव’ ।

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● फणसवाड़ी में स्थित है मुंबई का ‘छोटा तिरुपति मंदिर’

● वृषभ मासोत्सव का 19 मई को पूर्णाहुति के साथ समापन

वरिष्ठ संवाददाता /मुंबई वार्ता

दक्षिण मुंबई के फणसवाड़ी स्थित श्री वेंकटेश देवस्थान (मुंबई का छोटा तिरुपति बालाजी) मंदिर में सप्त दिवसीय श्री वसंतोत्सव अनुष्ठान का आयोजन किया गया है। मंगलवार 13 मई को दक्षिण भारतीय वैदिक पद्धति एवं पूजा परंपरा से प्रारंभ हुआ उत्सव सोमवार 19 मई तक चलेगा। इसके तहत प्रतिदिन वेंकटेश भगवान का मास नक्षत्र, पूजा गोष्टी तथा अनुष्ठान चलेगा। सुबह और शाम के सत्रों में पूजा-अर्चना, विशेष दर्शन, अभिषेक और आरती की जाएगी।

दक्षिण मुंबई के फणसवाड़ी स्थित प्राचीन वेंकटेश मंदिर को मुंबई का छोटा तिरुपति बालाजी मंदिर कहा जाता है। इसका निर्माण कार्य 1920 में प्रारंभ हुआ था। सात साल बाद 1927 में मंदिर के गर्भगृह में प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। पिछले 98 सालों से यह मंदिर दक्षिण भारतीय वैदिक विधि विधान से सौर मास के तहत अनेक धार्मिक आयोजन करता आ रहा है।

श्री वेंकटेश देवस्थान ट्रस्ट द्वारा संचालित मंदिर के प्रबंधक सुरेश चौधरी ने बताया कि ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष रामनारायण सोमानी के संयोजन में ट्रस्टियों की टीम द्वारा यहां प्रत्येक सौर मास में पूजा एवं अनुष्ठान किया जाता है। छोटा तिरुपति के नाम से प्रसिद्ध फणसवाडी के श्री वेंकटेश देवस्थान में सात दिनों तक श्री वसंतोत्सव मनाया जा रहा है। ग्रीष्म ऋतु में भगवान की प्रसन्नता हेतु इस आयोजन में भगवान को चारों तरफ से खास जडित सुगंधित पट्टिकाओं से आच्छादित मंडप में अभिषेक आदि यजन पूजन किया जा रहा है।

प्रतिदिन अभिषेक, पूजा,पाठ, भोग, आरती एवं प्रसाद वितरण हो रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल होकर भगवान का कृपा प्राप्त कर रहे हैं। साथ मंदिर परिसर में भगवान तिरुपति की सवारी निकलती है। श्री यथोक्तकारी भगवान का अवतारोत्सव, पुनर्वसु नक्षत्र के दिन श्रीवरदराज भगवान के अवतारोत्सव जैसा होता है।वृषभ मास उत्सव सूर्य जिस महीने में जिस राशि में प्रवेश करते हैं उसी के अनुसार सौर मास का निर्धारण होता है। 14 मई की रात सूर्यदेव ने वृषभ राशि में प्रवेश किया है।

अतः गणना के अनुसार यह वृषभ मास है। वृषभ मास में श्री वेंकटेश भगवान का श्री वसंतोत्सव 7 दिन का होता है। इस उत्सव का समापन श्रवण नक्षत्र के दिन होता है। रोज शाम 5 बजे उत्सव मूर्ति का अभिषेक होता है और मंदिर के भीतर सवारी निकलती है। इसी कड़ी में श्री वेंकटेश भगवान का तीन दिन का श्री प्रतिष्ठा उत्सव होता है। यह चित्रा नक्षत्र के दिन समाप्त होता है। इसमें भी रोज शाम को 5 बजे उत्सव मूर्ति का अभिषेक होता है और रात को सवारी निकलती है।

दोनों सत्र में दिव्य प्रबन्ध पाठ, शात्तुमुरा गोष्ठी विनियोग होते हैं। उत्सव के अंतिम दिन प्रातः उत्सव मूर्ति का अभिषेक किया जाएगा। शाम को उत्सव मूर्ति की शहर में सवारी निकलेगी।

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