मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

वसई किले में हनुमान मंदिर में अघोरी कृत्य करने वाले और ऐसा करके एक युवती की आत्महत्या का कारण बनने वाले स्वयंभू पुजारी और उसके बेटे के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वसईवासियों ने इस बात पर रोष जताया है कि ऐतिहासिक वसई किले में अघोरी कृत्य होने के बावजूद पुरातत्व विभाग ने इस पर आंखें मूंद लीं।
वसई की रेवती नील नामक युवती अपने कॉलेज के दोस्त आयुष राणा के साथ प्रेम संबंध में थी। उसने उसे शादी का झांसा दिया और उसके साथ शारीरिक संबंध भी बनाए। हालांकि आयुष के पिता ने यह कहते हुए शादी का विरोध किया कि वह निचली जाति से है। आयुष के पिता अजय राणा, जो पुजारी हैं, ने ‘कुंडलियां नहीं मिलने’ का कारण बताकर शादी का विरोध किया। इसके बाद उसके प्रेमी आयुष ने उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया। इससे परेशान होकर रेवती ने आत्महत्या करने का कदम उठाया।
आयुष के पिता अजय वसई किले में हनुमान मंदिर में पुजारी का काम करते थे। उन्होंने इसी मंदिर में अपना अलग निवास बना रखा है। उन्होंने इसी किले में अघोरी विद्या शुरू की थी। वे रेवती पर भी प्रयोग करते थे। उसकी कुंडली में मृत्यु का योग बताकर अजय ने उसके हाथ में गांठदार रस्सी बांधना, उससे अलग-अलग मंत्र पढ़वाना, उसे उदी देना और बैग में फूल रखने जैसे अघोरी प्रयोग शुरू किए थे। इसी तनाव के चलते रेवती ने चूहे मारने की जहरीली दवा खाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने इस मामले में मामला दर्ज कर पिता-पुत्र दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।
पुरातत्व विभाग किले में मंदिर पर कब्जा कर उसमें अपना संगमरमर का घर बनाने वाले स्वयंभू अजय राणा की अनदेखी पर आश्चर्य व्यक्त कर रहा है। स्वयंभू पुजारी के खिलाफ मानव बलि, अमानवीय बुराई, अघोरी प्रथा और जादू टोना निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पता चला है कि उक्त पुजारी ऐतिहासिक वसई किले में अघोरी प्रथा और जादू टोना करता है। इस पुजारी ने ऐतिहासिक वसई किले में हनुमान के एक छोटे से मंदिर पर कब्जा कर लिया और बिना किसी की अनुमति के उसका विस्तार किया। इसमें गैस, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, सोफा जैसे उपकरण लगाकर उसने अपना कारोबार शुरू किया।


