मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

मुंबई उच्च न्यायालय ने एमडी (मेफेड्रोन) जैसे मादक पदार्थ की तस्करी के आरोपी आसिफ कासम राजकोटवाला की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ पहले से कई एनडीपीएस मामले दर्ज हैं और वह पूर्व में जमानत पर छूटने के बाद भी दोबारा इसी तरह के अपराधों में शामिल रहा है तथा जमानत की शर्तों का उल्लंघन करता रहा है।


पुलिस के अनुसार, 13 अप्रैल 2025 को घाटकोपर एंटी नारकोटिक्स सेल ने वडाला (पूर्व) स्थित बीएमसी के सार्वजनिक शौचालय के सामने फुटपाथ से एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 57 ग्राम एमडी (मेफेड्रोन) बरामद किया था, जिसकी अनुमानित कीमत 19.40 लाख रुपये बताई गई।पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी ने दूसरे आरोपी आसिफ कासम राजकोटवाला का नाम उजागर किया, जो घटना के बाद फरार हो गया था। पुलिस ने गुजरात के सूरत से उसे गिरफ्तार कर मुंबई लाया। उसके घर की तलाशी के दौरान 22 ग्राम एमडी (मेफेड्रोन) भी बरामद किया गया था।
आरोपी ने मुंबई उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर की थी। हालांकि, अदालत ने पाया कि उसके खिलाफ पहले से एनडीपीएस अधिनियम के तहत कई मामले दर्ज हैं। इससे पहले भी उसकी जमानत याचिका सत्र न्यायालय द्वारा खारिज की जा चुकी थी।उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी जमानत पर रिहा होने के बाद फिर से उसी प्रकार के अपराध करता रहा है और उसने जमानत की शर्तों का भी उल्लंघन किया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
सह पुलिस आयुक्त (अपराध) अनिल कुंभारे, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कृष्णकांत उपाध्याय, मुंबई एंटी नार्कोटिक्स सेल की पुलिस उपायुक्त पूर्णिमा चौगुले श्रींगी के निर्देशानुसार उक्त कार्रवाई मुंबई ANC,घाटकोपर यूनिट के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्रीकांत आदाटे, पुलिस निरीक्षक दिगंबर पाटिल एवं टीम ने की है। मामले में सरकारी पक्ष की ओर से सहायक सरकारी अधिवक्ता मयूर सोनावणे ने प्रभावी पैरवी की।


