मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

कल शाम 6:00 से रात 11:00 तक जोरदार बारिश हुई। दक्षिणी गढ़चिरौली में मूसलाधार बारिश का कहर एक बार फिर देखने को मिला है। अलापल्ली से सिरोंचा को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 353C बंद हो गया है।पहली ही बारिश में वैकल्पिक मार्ग पर अनुबंध दर से बनाया गया पुल बह गया, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा । कई घंटे तक यातायात बंद हो हो गया था ।अब अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यदि बारिश ऐसे ही जारी रही, तो आने वाले दिनों में जिले की क्या हालत होगी।


हर साल मानसून में यह इलाका बाढ़ की चपेट में आता है। गांवों से संपर्क टूट जाता है, लोगों के पास न अनाज पहुंचता है, न पीने का पानी, और न ही स्वास्थ्य सुविधाएं।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कल ही जिले के सह पालक मंत्री आशीष जयस्वाल जिले दौरे पर थे। वे नए शिक्षण सत्र की शुरुआत पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए और पूरे दिन जिले के विकास कार्यों की समीक्षा में व्यस्त रहे।लेकिन इतना बड़ा हादसा हुआ, पुल बह गया और प्रशासन के किसी भी अधिकारी को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह दर्शाता है कि कागजों में योजनाएं बनती हैं, पर ज़मीन पर न बारिश की तैयारी होती है, न ही सूचना तंत्र सक्रिय है।
सवाल यह है कि हर साल बारिश से पहले आपदा प्रबंधन की समीक्षा क्यों नहीं होती?
वैकल्पिक मार्गों की गुणवत्ता की जाँच किसने की?
क्या यह केवल ठेकेदारों की लापरवाही है या अधिकारियों की चुप्पी भी जिम्मेदार है?
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक हर साल गढ़चिरौली के ग्रामीणों को बारिश में संपर्क कटाव, भुखमरी और संकट झेलना ही पड़ेगा।


