● महाराष्ट्र की अस्मिता को ठेस पोहोचानेवाले उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए.
●अपने गुजराती ‘मालिक’ को खुश करने के लिए एकनाथ शिंदे कितने गिरेंगे!
मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र छत्रपती शिवाजी महाराज के स्वाभिमान की भूमि है। स्वराज्य के लिए छत्रपती शिवाजी महाराज ने सूरत पर स्वारी की थी, लेकिन आज उसी शिवाजी महाराज के राज्य में एकनाथ शिंदे जैसे गुजराती गुलामों ने महाराष्ट्र का आत्मसम्मान गुजरात के चरणों में गिरवी रख दिया है। सत्ता के लिए लाचार हुआ व्यक्ति ही महाराष्ट्र की भूमपर “जय गुजरात” जैसे नारे दे सकता है, लेकिन स्वाभिमानी मराठी जनता यह अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करेगी, ऐसा तीव्र प्रहार महाराष्ट्र प्रदेश काँग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने किया।


एकनाथ शिंदे के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सपकाल ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना को तोड़कर, चुनाव चिन्ह और पार्टी का नाम गुजरात के ‘मालिक’ से लेकर सत्ता की कुर्सी हासिल करनेवाले शिंदे की मोदी-शाह स्तुति तो समझ में आती है, लेकिन अपने गुजराती मालिक को खुश करने के लिए “जय गुजरात” कहना यह महाराष्ट्र की अस्मिता पर किया गया खुला हमला है। अमित शाह के ‘वफादार सिपाही’ बनने की होड़ में एकनाथ शिंदे ने आज पूरे महाराष्ट्र का सिर शर्म से झुका दिया। महाराष्ट्र की सत्ता में एक से बढ़कर एक नमूने बैठे हैं, यह फिर एक बार साबित हो गया है। एकनाथ शिंदे को यह याद रखना चाहिए कि वे गुजरात के नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री हैं, यह बात क्या वे भूल चुके हैं? ऐसा सवाल करते हुए सपकाळ ने मांग की कि महाराष्ट्र का अपमान करनेवाले शिंदे को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।
शिंदे महाराष्ट्र और मुंबई को बेचकर गुजरात की तिजोरी भरने का काम कर रहे हैं। पिछले 11 वर्षों में महाराष्ट्र से उद्योग, संस्थाएं, कॉर्पोरेट ऑफिस और हजारों करोड़ों की पूंजी फडणवीस और शिंदे की वजह से गुजरात भेज दी गई है। वेदांता-फॉक्सकॉन जैसा विशाल प्रकल्प, जिससे लाखों युवाओं को रोजगार मिलनेवाला था, वह भी गुजरात को सौंप दिया गया। एक ओर महाराष्ट्र का किसान आत्महत्या कर रहा है, युवाओं को रोजगार नहीं है, महिलाएं असुरक्षित हैं, कुपोषण बढ़ रहा है, और दूसरी ओर सत्ता में बैठे यह लोग गुजरात की गुलामी में मग्न हैं।
ऐसे महाराष्ट्रद्रोही लोगों को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, ऐसा काँग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा है।


