डॉ अनुरागी की पुस्तक ज्ञानगंगा श्रीमद्भगवतगीता को मिली लोकप्रियता।

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मुंबई वार्ता/शिव पूजन पांडेय

महानगर के आध्यात्म प्रेमी अरुण प्रकाश मिश्र ‘अनुरागी’ की पुस्तक हिन्दी एवं अंग्रेजी में अनुवादित ” ज्ञानगंगा श्रीमद्भगवतगीता ” मुंबई से लेकर देशों एवं विदेशों तक पाठकों के बीच अपनी छाप छोड़ रही है।ज्ञानगंगा श्रीमद्भगवतगीता के वरिष्ठ कवि एवं उत्कृष्ट लेखक अरुण प्रकाश मिश्र अनुरागी का जन्म 23 जुलाई 1955 में हुआ।

महानगर में नौकरी करते हुए साहित्य लेखन कार्य किया जिन्हें प्रथम पुरस्कार महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी द्वारा विष्णुदास भावे (स्वर्ण), विश्व हिंदी साहित्य संस्थान अहमदाबाद द्वारा साहित्य सेतु काव्य वैभव जैसे सैकड़ों सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।उक्त पुस्तक में डॉ अरुण प्रकाश मिश्र अनुरागी ने जीवन को सरल बनाने के लिए श्रीमद्भागवदगीता का बहुत ही सरस और सरल काव्यात्मक अनुवाद हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषा में एक साथ किया है। ऐसा माना जाता है कि जीवन के गूढ़तम सवालों का जवाब इस ग्रन्थ में छिपा हुआ है,जिसे अनुरागी जी ने आम जनता की भाषा में प्रस्तुत किया है।अनुरागी का ऐसा कहना है कि इस पुस्तक की प्रणेता इनकी धर्मपत्नी हैं,जिनके आग्रह पर इस पुस्तक का सृजन किया गया है। उक्त चर्चित पुस्तक श्रीमद्भागवत के लेखक ने जिस आधार पर अनुभव और ज्ञान का प्रस्तुतीकरण दिया है उसका प्रतिफल मिलना स्वाभाविक है जो उन्हें मिल रहा है।

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