मुख्यमंत्री के हाथों सीओईपी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पुस्तकालय व कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग की नई इमारत का उद्घाटन ।

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■ नवाचार शोध के लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा देने वाले संस्थानों को स्वायत्तता देना समय की मांग.

■ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सीओईपी जीवन गौरव और अभिमान पुरस्कारों का वितरण.

मुंबई वार्ता संवाददाता

देश के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा देने वाले संस्थानों को नवाचार शोध और सक्षम मानव संसाधन निर्माण के लिए स्वायत्तता देना समय की मांग है और इस दृष्टि से केंद्र एवं राज्य स्तर पर सरकार की ओर से प्रयास शुरू हैं, ऐसा प्रतिपादन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया। सीओईपी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में पुस्तकालय और कंप्यूटर इंजीनियरिंग की नई इमारत का उद्घाटन तथा इंजीनियरिंग दिवस के अवसर पर आयोजित ‘सीओईपी अभिमान पुरस्कार’ समारोह में मुख्यमंत्री फडणवीस बोल रहे थे।

इस अवसर पर उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील, सीओईपी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु सुनील भरुड, कुलसचिव डॉ. दयाराम सोनवणे, पूर्व निदेशक शैलेश सहस्त्रबुद्धे, पूर्व विद्यार्थी संगठन के अध्यक्ष भरत गीते, सचिव सुजीत परदेशी आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, स्वायत्तता मिलने से सीओईपी जैसे संस्थान वैश्विक स्तर पर भागीदारी कर सकेंगे, प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान और सहयोगी शोध कर सकेंगे। इससे महाराष्ट्र की 3 ट्रिलियन और भारत की 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते समय सक्षम मानव संसाधन का सेतु खड़ा होगा।

आने वाले समय में अधिक से अधिक संस्थानों को स्वायत्तता देने का राज्य सरकार का रणनीतिक निर्णय है, ऐसा मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया।

उन्होंने कहा, सीओईपी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विस्तार के लिए चिखली में 28 एकड़ जमीन दी गई है। ऐसे संस्थानों को और सक्षम करने के लिए शासन स्तर से मदद की जाएगी। साथ ही शोध के लिए आवश्यक निधि उपलब्ध कराई जाएगी। भारत के प्रतिष्ठित और वरिष्ठ संस्थान के रूप में सीओईपी को देखा जाता है। इस संस्थान का 172 वर्षों का इतिहास है और 2028 में यह संस्थान 175 वर्ष पूरे करेगा। यह भारत के शैक्षिक इतिहास की विलक्षण यात्रा है। सीओईपी से शिक्षा लेकर आज विभिन्न क्षेत्रों में पूर्व विद्यार्थी कार्यरत हैं और समाज के सभी क्षेत्रों को समृद्ध करने का कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री आगे बोले, 1990 के कम्प्यूटरीकरण के समय अनेक शंका-कुशंकाएँ उत्पन्न हुई थीं, लेकिन धीरे-धीरे मानव संसाधन का निर्माण होता गया, भारतीय युवाओं ने सिलिकॉन वैली पर कब्जा किया। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अपनी क्षमता दिखाने के कारण भारत को वैश्विक स्तर पर देखने का दृष्टिकोण बदला। इसका सारा श्रेय इंजीनियरों को ही जाता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कंप्यूटिंग के कारण आज दुनिया में तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं। इन परिवर्तनों के साथ नई-नई संभावनाएँ पैदा हो रही हैं और हैकेथॉन जैसे उपक्रमों में उसकी झलक दिखाई देती है।

पुणे के कृषि हैकेथॉन में बदलते जलवायु के कारण उत्पन्न नए कीटों पर मात करने के लिए एआई की सहायता से अनुमान दर्शाने वाला मॉडल विकसित हुआ है और यह निश्चित ही आशादायक है। तकनीकी संस्थान और इंजीनियरिंग कॉलेजों को बदलती तकनीक के अनुसार मानव संसाधन तैयार करने के लिए पहल करनी चाहिए। नई शैक्षिक नीति पारंपरिक विषयों को आधुनिकता के साथ नई संभावनाएँ उपलब्ध करा रही है, इसलिए युवावर्ग इस बदलाव को स्वीकार करेगा, ऐसी आशा भी मुख्यमंत्री ने व्यक्त की।

मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने कहा, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई शैक्षिक नीति में भारतीय ज्ञानपरंपरा का समावेश हुआ है। इसमें शोध, पेटेंट और रॉयल्टी पर जोर दिया गया है। 2047 में विकसित भारत में इन बातों का योगदान महत्वपूर्ण रहेगा। सीओईपी जैसे संस्थानों को मजबूत करने में शासन सहयोग करेगा।

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