मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

मुंबई महानगरपालिका की सावधि जमा राशि, जो कभी 90 हज़ार करोड़ से अधिक थी, अब घटकर ८० हज़ार करोड़ रह गई है। विकास कार्यों के लिए सावधि जमा राशि का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है और पिछले ढाई वर्षों में सावधि जमा राशि में कमी आने लगी है।


प्रशासन ने ४ फरवरी को मुंबई महानगरपालिका के चालू वित्त वर्ष का बजट पेश किया था। उस समय महानगरपालिका की सावधि जमा राशि ८१ हज़ार करोड़ थी। पिछले सात महीनों में यह घटकर ८० हज़ार करोड़ रह गई है।देश की सबसे धनी महानगरपालिका कही जाने वाली मुंबई महानगरपालिका की सावधि जमा राशि लगातार कम होती जा रही है। महानगरपालिका के विभिन्न विभागों की अधिशेष राशि की सावधि जमा राशि विभिन्न बैंकों में है। इन सावधि जमा राशियों को उच्चतम ब्याज दर देने वाले बैंकों में निवेश किया गया है। उस सावधि जमा राशि से पालिका की वित्तीय स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है।


महानगरपालिका के इसी सावधि जमा राशि से स्थापना व्यय और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया का भुगतान किया जाता है। इसके अलावा, इन जमाओं में विभिन्न विकास कार्यों के लिए ठेकेदारों से ली गई जमा राशि भी शामिल है। कोरोना काल के बाद, निर्माण के लिए प्रीमियम में छूट दी गई। इससे निर्माण क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिला और मार्च २०२२ में नगर पालिका को १४,७५९ करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई। इसके कारण, मार्च २०२२ में नगर पालिका की सावधि जमा राशि ९१,००० करोड़ रुपये को पार कर गई। हालाँकि, उसके बाद इन सावधि जमाओं में गिरावट शुरू हो गई। जून 2025 में, ये सावधि जमा राशि घटकर ८०,७४० करोड़ रुपये रह गई।
नगर पालिका ने पिछले दो-तीन वर्षों में प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाएँ शुरू की हैं और इन परियोजनाओं पर काम अगले दो से पाँच वर्षों तक जारी रहेगा। इसमें वर्सोवा-दहिसर कोस्टल रोड और दहिसर-भायंदर लिंक रोड, गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड जैसी विभिन्न परियोजनाओं के सड़क, पुल, कंक्रीटिंग कार्य शामिल हैं, जिसके परिणामस्वरूप नगर पालिका पर २ से २.५ लाख करोड़ रुपये की देनदारियाँ हैं।


