मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

मुंबईवासियों के लिए खुशखबरी। मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाले सभी सात बांध अब 100% भर चुके हैं। जिससे आने वाले साल के लिए मुंबईवासियों की पानी की चिंता पूरी तरह दूर हो गई है। इन बांधों में प्रचुर मात्रा में पानी होने के कारण, जून २०२६ तक मुंबई की पानी की ज़रूरत आसानी से पूरी हो जाएगी। इससे लाखों मुंबईवासियों को राहत मिली है।


वर्तमान में, मुंबई को सात बांधों से पानी की आपूर्ति की जाती है। इन सात बांधों में से दो मुंबई के भीतर और पाँच मुंबई के बाहर हैं। इनमें अपर वैतरणा, तानसा, मध्य वैतरणा और मोदक सागर बांध शामिल हैं। ये अपनी पूरी क्षमता तक भर चुके हैं। वहीं, अन्य बांधों में पानी का भंडारण ९९ प्रतिशत से ज़्यादा देखा जा रहा है। मुंबई को जलापूर्ति करने वाले सात बांधों में से चार प्रमुख बांध, अपर वैतरणा, तानसा, मध्य वैतरणा और मोदक सागर, अपनी पूरी क्षमता तक भर जाते हैं, जिससे मुंबईवासियों की जल समस्या का समाधान हो जाता है।


इन चारों बांधों से पानी गुरुत्वाकर्षण की सहायता से सीधे भांडुप पंपिंग स्टेशन पहुँचता है। वहाँ, पानी को संसाधित करके मुंबई के घरों तक पहुँचाया जाता है। मुंबई की कुल जलापूर्ति का 50 प्रतिशत इन्हीं बांधों से आता है, जबकि शेष ५० प्रतिशत भाटसा बांध से आता है।भांडुप पंपिंग स्टेशन से लगभग ६० किलोमीटर दूर स्थित तानसा बांध का पानी गुरुत्वाकर्षण द्वारा पहले मध्य वैतरणा और फिर मोदक सागर बांध तक पहुँचता है। वहाँ से, यह सीधे भांडुप पंपिंग स्टेशन पहुँचता है। इस स्टेशन पर, पानी को शुद्ध किया जाता है। उसके बाद, इसे मालाबार हिल से मुंबई के विभिन्न हिस्सों में स्थित घरों तक पंप किया जाता है।
यह वास्तव में एक अद्भुत तकनीक है, जो पूरे वर्ष मुंबई की प्यास बुझाती है।मुंबई को प्रतिदिन लगभग ४,००० मिलियन लीटर (एमएलडी) पानी की आवश्यकता होती है। इसमें से 50% पानी इन बांधों से आता है, जबकि शेष 50% भातसा बांध से आता है। मुंबई के निवासियों को राहत मिली है क्योंकि बांध वर्तमान में 99% से अधिक भरे हुए हैं।


