मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

मुंबई में ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ दिखाकर एक कारोबारी से ५८ करोड़ रुपये लूटे जाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और पैसों की तलाश कर रही है।ईडी और सीबीआई अधिकारी बनकर एक कारोबारी और उनकी पत्नी को ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ के जरिए लूटा गया।


आरोपियों ने १८ बैंक खातों का इस्तेमाल कर पैसे निकाले। आरोपियों के नाम अब्दुल नासिर खिल्ली, अर्जुन कड़वासरा, जेठाराम कड़वासरा हैं। उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में शामिल बताकर ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ में फंसाया गया। इस बीच, ९ अगस्त से ८ अक्टूबर तक कारोबारी ने आरटीजीएस के जरिए ५८.१३ करोड़ रुपये का भुगतान किया।


■ डिजिटल गिरफ्तारी क्या है?
डिजिटल गिरफ्तारी का मतलब डिजिटल रूप में गिरफ्तारी है। इस प्रकार के घोटाले में, कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी, ईडी और सीबीआई अधिकारी होने का दावा करते हुए संदेश भेजता है या लाइव वीडियो कॉल करता है। वे ड्रग या मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में डिजिटल गिरफ्तारी का दिखावा करते हैं। डिजिटल गिरफ्तारी एक नए प्रकार की ऑनलाइन धोखाधड़ी है, जिसमें साइबर अपराधी सरकारी अधिकारी, पुलिस या कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं और पैसे ऐंठते हैं।


