मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई के मंत्रालय में 11 फरवरी 2026 को हुई एक अहम बैठक ने फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री से जुड़े कलाकारों के भविष्य को नई दिशा देने की उम्मीद जगाई है।


Cine & TV Artistes’ Association (CINTAA) की अध्यक्ष पूनम ढिल्लों और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट पद्मिनी कोल्हापुरे ने महाराष्ट्र के माननीय श्रम मंत्री आकाश फुंडकर तथा श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात कर नए लेबर कोड के तहत कलाकारों के अधिकारों, सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक संरक्षण पर विस्तृत चर्चा की।


मंत्रालय में आयोजित इस बैठक में प्रिंसिपल सेक्रेटरी (लेबर) श्रीमती इडजेस कुंदन, लेबर कमिश्नर डॉ. एच. पी. तुम्मोद, एडिशनल लेबर कमिश्नर भगवान अंधाले, डिप्टी सेक्रेटरी श्रीमती रोशनी कदम पाटिल, सेशन जज व लीगल एडवाइजर श्री सुनील शर्मा सहित श्रम मंत्रालय की वरिष्ठ टीम उपस्थित रही।
बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए नए लेबर कोड के तहत महाराष्ट्र में बनाए जा रहे नियमों में फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों, तकनीशियनों और अन्य श्रमिकों के वैध अधिकारों को प्रभावी रूप से शामिल करना था। ऑडियो-विज़ुअल वर्कर्स के लिए प्रस्तावित प्रावधानों—जैसे समय पर भुगतान, सामाजिक सुरक्षा, उचित वेतन, कार्य के निर्धारित घंटे और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन—पर विस्तार से विचार किया गया।
CINTAA प्रतिनिधियों ने फिल्म इंडस्ट्री की जमीनी सच्चाइयों को सामने रखते हुए बताया कि असंगठित कार्यप्रणाली के कारण कई कलाकारों को आज भी समय पर भुगतान, स्पष्ट अनुबंध और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है। इस पर श्रम मंत्री आकाश फुंडकर ने भरोसा दिलाया कि नए लेबर कोड में ऑडियो-विज़ुअल वर्कर्स के लिए कानूनी संरक्षण का प्रावधान किया गया है, जिससे कलाकारों और तकनीशियनों को सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा नियमों की अंतिम अधिसूचना जारी करने से पहले सार्वजनिक रूप से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। CINTAA को निर्देश दिए गए कि वह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर अपने सुझाव औपचारिक रूप से प्रस्तुत करे। साथ ही यह आश्वासन भी दिया गया कि निर्माताओं और तकनीशियनों सहित फिल्म इंडस्ट्री के सभी पक्षकारों की राय पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
बैठक के अंत में पूनम ढिल्लों ने श्रम मंत्रालय और CINTAA सदस्यों के बीच एक विस्तृत संवाद सत्र आयोजित करने का अनुरोध किया, ताकि कलाकारों की समस्याओं को सीधे समझा जा सके और उन्हें नए लेबर कोड के प्रावधानों की जानकारी दी जा सके। यह पहल न केवल जागरूकता बढ़ाएगी, बल्कि कलाकारों को अपने अधिकारों के प्रति सशक्त भी बनाएगी।
फिल्म इंडस्ट्री लंबे समय से अनिश्चित भुगतान, अनौपचारिक ढांचे और सामाजिक सुरक्षा के अभाव जैसी चुनौतियों से जूझती रही है। ऐसे में लेबर कोड के तहत स्पष्ट नियम और कानूनी संरक्षण का निर्माण एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
मंत्रालय की यह बैठक सिनेमा जगत के हजारों कलाकारों और तकनीशियनों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है—जहां मेहनत को न सिर्फ तालियां, बल्कि कानून का मजबूत सहारा भी मिलेगा।


