■ मुंबई महानगरपालिका में पार्षदों को अजेंडा पहुंचाने के लिए तड़के 3 बजे से दौड़ते कर्मचारी।
श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

एशिया की सबसे समृद्ध महानगरपालिका मानी जाने वाली मुंबई महानगरपालिका का प्रशासनिक कामकाज आज भी बड़े पैमाने पर ऑफलाइन चल रहा है। पार्षदों को कार्यक्रम पत्रिका, अजेंडा और अतिरिक्त प्रस्तावों की प्रतियां घर-घर पहुंचाने के लिए कर्मचारियों को तड़के तीन बजे से काम पर लगना पड़ता है। इस काम के लिए 11 गाड़ियां और 13 चपरासी तैनात किए गए हैं, जिससे कर्मचारियों पर भारी दबाव पड़ रहा है।


मुंबई महानगरपालिका में 227 निर्वाचित और 10 मनोनीत मिलाकर कुल 237 पार्षद हैं। इन सभी को सभाओं से संबंधित कार्यक्रम पत्रिका, अजेंडा, अतिरिक्त प्रस्तावों की सूचना और अन्य दस्तावेज घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सचिव विभाग के कर्मचारियों पर होती है। कर्मचारियों को तड़के ही लंबी दूरी तय करते हुए ट्रैफिक जाम से जूझकर पार्षदों के घरों तक पहुंचना पड़ता है। कई बार देर रात या सुबह के समय पार्षदों की नींद के दौरान दरवाजे की घंटी बजाकर दस्तावेज देना पड़ता है, जिससे उन्हें नाराजगी भी झेलनी पड़ती है।


कुछ मामलों में पार्षद दरवाजा नहीं खोलते तो कर्मचारियों को बिल्डिंग के सुरक्षा रक्षक के पास या घर के बाहर ही दस्तावेज छोड़ने पड़ते हैं। इसके बाद कर्मचारी फिर सुबह महानगरपालिका कार्यालय में अपनी नियमित ड्यूटी पर लौटते हैं, जिससे उनकी नींद और स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के गटनेता अशरफ आजमी ने सवाल उठाया है कि कर्मचारियों की मानसिक स्थिति और स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन कितना गंभीर है।


उन्होंने कहा कि करीब 80,192 करोड़ 56 लाख रुपये के बजट वाली मुंबई महानगरपालिका को डिजिटल युग में भी ऑफलाइन व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जबकि व्हाट्सऐप, जीमेल और फैक्स जैसे ऑनलाइन माध्यम उपलब्ध हैं।
बताया गया है कि इस प्रक्रिया पर हर महीने लगभग 5 से 10 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं और वाहनों के उपयोग से ईंधन की भी बड़ी मात्रा में बर्बादी हो रही है। महाविकास आघाड़ी के पार्षदों ने इस पर संज्ञान लेते हुए महानगरपालिका आयुक्त भूषण गगराणी और महापौर रितू तावडे से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।दरअसल, महानगरपालिका में हर सप्ताह स्थायी समिति, शिक्षा समिति, सुधार समिति, स्वास्थ्य समिति, स्थापत्य समिति और सभागृह की बैठकें होती हैं।
इन बैठकों के लिए पार्षदों को कार्यक्रम पत्रिका, अजेंडा और अन्य दस्तावेज भेजे जाते हैं।वर्ष 2017 में महानगरपालिका में ई-ऑफिस प्रणाली लागू करने का प्रयास किया गया था, ताकि पार्षदों और विभागों के बीच दस्तावेजों का आदान-प्रदान डिजिटल माध्यम से हो सके। हालांकि यह प्रयास सफल नहीं हो सका और उसके बाद प्रशासन की ओर से इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। परिणामस्वरूप आज भी महानगरपालिका का यह कामकाज ऑफलाइन ही चल रहा है।


