महुआ

Date:

सुरेश मिश्र/कवि/मुंबई वार्ता

महुआ प्यारा, महुआ न्यारा
महकाता है उपवन सारा।

पीला महुआ और सफेद,
है इसकी पेंदी में छेद।

लप्सी,ठोंकवा,लाटा है,
इससे बने पराठा है।

ये निर्धन का मेवा है,
देता हरदम सेवा है।

सब फूलों में आला है,
शक्ति बढ़ाने वाला है।

दुनिया में सरनाम है ये,
बैलों का बादाम है ये।

जब ये धरती पर आए,
पीली चादर फैलाए।

बागों में चौबारों में,
बिनते लोग कतारों में।

किसमिस बनते ज्यों अंगूर,
महुआ का भी यही सुरूर।

छोटे,मझले,बड़े-बड़े,
भर दें झउआ और घड़े।

नशा बसंती लाता है,
तो मस्ती भर जाता है।

महुआ रानी कहते हैं,
लोग नशे में बहते हैं।

समझो तुम हालातों को,
अब यथार्थ की बातों को।

बेंचो पैसा आता है,
ये खुशहाली लाता है।

महुआ खूब लगाओ रे,
सारी खुशियां पाओ रे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

प्रमुख खबरे

More like this
Related

भक्ति और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई श्रीमद् भागवत कथा सैकड़ों श्रद्धालुओं ने लिया प्रसाद।

मुंबई वार्ता संवाददाता श्री कृष्ण समर्पण चैरिटेबल ट्रस्ट की...

19 वर्षों से फरार चोरी का आरोपी बांद्रा से गिरफ्तार, कोर्ट ने घोषित किया था भगोड़ा।

श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता मुंबई पुलिस के खार पुलिस स्टेशन...